CM Rise Schools plan in controversy: डामर प्लांट और गिट्टी क्रेशर के बीच 32 करोड़ की लागत से बना सीएम राइज स्कूल

बड़ा सवाल - बच्चों को प्रदूषण से बचाएगा कौन? प्रशासन बना मूकदर्शक, जहरीले धुएं ने बढ़ाई चिंता


बैतूल। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए स्थापित किए जा रहे सीएम राइज स्कूलों की योजना घोड़ाडोंगरी में विवादों में घिर गई है। 32 करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्कूल की बिल्डिंग के आसपास फैले प्रदूषण ने बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। स्कूल निर्माणाधीन क्षेत्र के एक किलोमीटर के दायरे में तीन गिट्टी क्रेशर प्लांट और एक डामर मिक्सिंग प्लांट चल रहे हैं, जिनसे निकलने वाली धूल और जहरीला धुआं आसपास के वातावरण को दूषित कर रहा है।
स्कूल बिल्डिंग के आसपास के क्षेत्र में डामर प्लांट और गिट्टी क्रेशर से उड़ने वाली धूल इतनी अधिक है कि यहां आने-जाने वालों को आंखों में जलन और सांस लेने में कठिनाई होती है। इन प्लांटों से निकलने वाला काला धुआं आसमान में काली घटाओं जैसा दिखता है। ठंड और गर्मी के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। पेड़-पौधों पर धूल की मोटी परत जम चुकी है, जिससे आसपास का पर्यावरण पूरी तरह से दूषित हो चुका है।
— डामर प्लांट को लेकर अनापत्ति पत्र पर उठे सवाल —
कान्हावाड़ी ग्राम पंचायत के सचिव खेमचंद यादव ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने डामर मिक्सिंग प्लांट को कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार यह प्लांट बिना मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लिए ही संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्लांट संचालक नियमों की अनदेखी कर प्रदूषण फैला रहे हैं।
कान्हावाड़ी ग्राम पंचायत के सरपंच के पति और जिला हित रक्षक प्रमुख नरेंद्र उईके ने बताया कि ग्रामीण इन प्लांटों से हो रहे प्रदूषण के खिलाफ पहले भी शिकायत कर चुके हैं। अब जब क्षेत्र में सीएम राइज स्कूल बन रहा है, तो बच्चों की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंताएं और बढ़ गई हैं। उन्होंने बताया कि बिना अनुमति चल रहे इन प्लांटों को जल्द से जल्द अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिए कलेक्टर बैतूल से मांग की जाएगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि गैर-आदिवासी लोग आदिवासी क्षेत्र में उद्योग चला रहे हैं और प्रशासन आंख मूंदे हुए है।
— प्रशासन की उदासीनता पर उठे सवाल —
प्रश्न यह उठता है कि क्या प्रशासन सीएम राइज स्कूल के संचालन से पहले इन प्लांटों को हटाएगा और क्षेत्र के प्रदूषण को नियंत्रित करेगा, या फिर नियमों को ताक पर रखकर बच्चों को प्रदूषित वातावरण में पढ़ाई करने के लिए मजबूर करेगा? फिलहाल बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना प्रदूषण के कारण संकट में आ गई है। यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्कूल बच्चों के लिए शिक्षा का नहीं, बल्कि बीमारियों का केंद्र बन सकता है। अब देखना यह है कि मध्य प्रदेश शासन और प्रशासन इस पर क्या कदम उठाते हैं।
2025 में हो सकता है हैंडोवर
सीएम राइज स्कूल को 2025 में स्कूल प्रशासन को हैंडोवर किया जा सकता है। इस बिल्डिंग में आधुनिक सुविधाएं, स्मार्ट क्लासरूम और बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। हालांकि, प्रदूषित वातावरण के कारण पालकों में यह चिंता बनी हुई है कि क्या बच्चों की सेहत के लिए यह सुरक्षित होगा। प्रशासन पर अब यह जिम्मेदारी है कि स्कूल संचालन से पहले प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में शिक्षा मिल सके।

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