Betul news: जनजातीय गौरव दिवस आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर: प्राचार्य लिल्होरे
कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बैतूल गंज में मनाया जनजातीय गौरव दिवस

आदिवासी नायकों की भूमिका विषय पर चित्रकला, निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन
बैतूल। ई.एफ.ए. शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बैतूल गंज में जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन प्राचार्य ललितलाल लिल्होरे के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक, शिक्षिकाएं और छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
प्राचार्य ललितलाल लिल्होरे ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय गौरव दिवस, जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मानित करने का दिन है। उन्होंने बिरसा मुंडा के योगदान को याद करते हुए कहा कि 1893 में बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों द्वारा बनाए गए वन अधिनियम और शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और स्वतंत्रता के लिए क्रांति का नेतृत्व किया। बिरसा मुंडा ने जनजातीय समाज को यह विश्वास दिलाया कि यह धरती उनकी है और वे ही इसके रक्षक हैं। उनकी प्रेरणा से जनजातीय समाज ने अंग्रेजों के खिलाफ मजबूती से मोर्चा खोला, जिससे अंग्रेजों को कानून बदलने पर मजबूर होना पड़ा।
कार्यक्रम में शिक्षक महेश गुंजेले ने आदिवासी समाज की परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समाज प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति अपनी श्रद्धा और संरक्षण के प्रण को दृढ़ता से निभा रहा है। आदिवासी समाज में नारी शक्ति को प्राथमिकता, प्रकृति से प्रेम और वन्यजीवों को पूजने की परंपरा विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
इस अवसर पर विद्यालय में स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी नायकों की भूमिका विषय पर चित्रकला, निबंध और कविता प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। चित्रकला में यशवी सोनी ने प्रथम स्थान, चेतना साहू ने द्वितीय और आयूषी पाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निबंध लेखन में मोनोलीका साहू ने प्रथम, तनुश्री रघुवंशी ने द्वितीय और रिधी ठोके ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कविता लेखन में पूर्वा पवार प्रथम, तनिषा पाल द्वितीय और गीता बारस्कर तृतीय स्थान पर रहीं। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक नर्मदाप्रसाद मिश्रा ने किया। इस आयोजन में समस्त शिक्षकों ने सहयोग दिया। प्राचार्य और शिक्षकों ने सभी छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित किया।




