from the pages of history :1917 से साहू परिवार कर रहा परंपरा का निर्वहन

बैतूल गंज में 2 सितंबर को मनाया जाएगा 107वां सार्वजनिक पोला उत्सव

बैतूल। बैतूल गंज में 106 वर्षों से मनाया जा रहा ऐतिहासिक सार्वजनिक पोला उत्सव इस वर्ष भी 2 सितंबर को 107 वे वर्ष धूमधाम से मनाया जाएगा। इस बार उत्सव की विशेषता यह होगी कि नगर पालिका परिषद की स्वीकृति के बाद पहली बार नंदीश्वर भगवान की मूर्ति की स्थापना की जाएगी। इस अवसर पर 1 सितंबर रविवार को नंदीश्वर भगवान की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो दोपहर 3 बजे प्रारंभ होगी। शोभायात्रा के उपरांत नगरपालिका प्राथमिक शाला के सामने स्थित पोला स्थल पर भगवान नंदीश्वर की मूर्ति की स्थापना की जाएगी।

1917 से चली आ रही है परंपरा

पोला उत्सव की इस परंपरा की शुरुआत 1917 में बैतूल गंज निवासी दिवंगत कन्हाई साहू ने की थी। उनके बाद, उनके ज्येष्ठ पुत्र जयराम साहू ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। 1957 से यह उत्सव दिवंगत रतनलाल साहू द्वारा संपन्न किया गया। 1983 में रतनलाल साहू के निधन के बाद, उनके पांच पुत्र ओंकार प्रसाद, ओमप्रकाश, किशोर चंद्र, अधिवक्ता नरेश चंद्र साहू, और नरेंद्र कुमार साहू द्वारा सामूहिक रूप से पोला उत्सव की व्यवस्था की जा रही है। यह उत्सव पारिवारिक धरोहर के रूप में महत्वपूर्ण है, साथ ही पूरे नगर के लिए एक विशेष उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।

कृषकों को प्रोत्साहन के लिए विशेष पुरस्कार

दिवंगत रतनलाल साहू की स्मृति में प्रतिवर्ष उनके पांच पुत्रों द्वारा पोला उत्सव में हिस्सा लेने वाले कृषकों के लिए विशेष पुरस्कारों की व्यवस्था की जाती है। इसमें सुंदर स्वरूप और पुष्ठ जोड़ी पर एक शील्ड, सुंदर सजावट पर एक शील्ड, और पांच सांत्वना पुरस्कार शामिल हैं। यह व्यवस्था किसानों को प्रोत्साहित करने और पशुपालन की भावना को जागृत करने के उद्देश्य से की गई है।

समाज की एकता और परंपरा का प्रतीक

अधिवक्ता नरेशचंद्र साहू ने बताया कि यह उत्सव समाज की एकता और परंपरा को भी प्रदर्शित करता है। नंदीश्वर भगवान की पूजा-अर्चना और तोरण पूजन के साथ यह उत्सव हर वर्ष और भी अधिक धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार नगर पालिका परिषद की स्वीकृति से नंदीश्वर भगवान की मूर्ति की स्थापना इस उत्सव को और भी ऐतिहासिक बना देगी। इस वर्ष पोला उत्सव में भगवान नंदीश्वर की मूर्ति की शोभायात्रा और स्थापना का कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। बैतूल के सभी नागरिक इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए उत्साहित हैं, जिससे इस परंपरा को और भी सुदृढ़ किया जा सके।

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