Jawara Kalash : आस्था और उल्लास के साथ महाशिवपुराण के बाद किया जवारे का विसर्जन
बैतूलबाजार के चौकीपुरा से जवारा कलशों की विसर्जन यात्रा निकाली गई, गुलाल और पुष्पवर्षा के बीच महिलाओं ने किया नृत्य

Jawara Kalash : बैतूलबाजार। धार्मिक नगरी बैतूलबाजार में सात दिन तक संगीतमय श्री शिवमहापुराण की कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने के बाद गुरुवार को भक्तों ने जवारों का विसर्जन सापना नदी के पवित्र जल में किया। भक्तिभाव के साथ उल्लास और उमंग के बीच सिर पर कलश धारण किए महिलाएं भी नृत्य करने से स्वयं को रोक नहीं पाईं। जवारा कलशों की विसर्जन यात्रा से नगर का पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

बैतूलबाजार के चौकीपुरा में समस्त नगर वासियों के सहयोग से आयोजित की गई सात दिवसीय संगीतमय श्री शिव महापुराण कथा का समापन बुधवार को हवन-पूजन और भंडारा प्रसादी के वितरण के साथ किया गया। शिव महापुराण कथा के शुभारंभ पर सुख समृद्धि की कामना को लेकर कलश में बोए गए जवारों का नियमित पूजन किया गया और कथा समापन पर उनका पवित्र जल में गुरुवार को विसर्जन किया गया।

गुरुवार को शाम पांच बजे चौकीपुरा से जवारा कलशों को सिर पर रखकर महिलाओं के द्वारा बैंड बाजे के साथ विसर्जन यात्रा प्रारंभ की। इसमें बड़ी संख्या में युवा और बच्चे भगवान भोलेनाथ के भजनों पर नृत्य करते चल रहे थे। सिर पर कलश उठाकर जवारा विसर्जन के लिए बड़ी संख्या में महिलाओं ने भागीदारी निभाई। कलश उठाए महिलाओं की कतार देखते ही बन रही थी। विसर्जन यात्रा के दौरान दंडवत प्रणाम कर भक्तों ने भगवान का आशीर्वाद लिया।विसर्जन जुलूस में सबसे आगे सिर पर कलश रखकर महिलाएं चल रहीं थीं।
उसके पीछे भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग स्वरूप प्रतिमा की झांकी थी। रास्ते मेें जगह-जगह भक्तों पर लोगों ने पुष्पवर्षा की और गुलाल बरसाया। मान्यता है कि जवारों को फसलों की अच्छी पैदावार होने का सूचक माना जाता है। भगवान की कृपा प्राप्ति के लिए जवारों का अंकुरण किया जाता है। जिसमें जौं का रस आयु की वृद्धि के लिए व शरीर के सभी प्रकार के रोगों का नाश करने की क्षमता रखता है।
सभी की समृद्धि और सद्बुद्धि की कामना की:
जवारा कलश विसर्जन यात्रा बाजार चौक से होते हुए माचना नदी के गणेश घाट पर पहुंची। यहां जवारों का विधि विधान के साथ पूजन कर आरती की गई। भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग स्वरूप प्रतिमा का भी पूजन किया गया और आरती उतारकर सभी की समृद्धि और सद्बुद्धि की कामना की गई। इसके बाद महिलाओं ने नदी के पवित्र जल में उतरकर जवारों का विसर्जन किया। बड़ी संख्या में मौजूद भक्ताें के द्वारा शिवलिंग स्वरूप प्रतिमा का भी विसर्जन किया।




