राजपूत शूरवीरों की याद दिलाता है 12वी सदी में निर्मित आखतवाड़ा का प्राचीन शिव मंदिर
10 मार्च को होगा रुद्राभिषेक और शिव भक्तों के लिए विशाल भंडारा

बैतूल। क्षत्रिय राजपूत समाज हमेशा देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए बलिदान देता आया है। मान्यता है कि मुगल काल में धर्म की रक्षा के लिए राजस्थान से मप्र की ओर राजपूत शूरवीरों ने रुख किया था, जिनका पहला पड़ाव खेड़ी सावलीगढ़ के पास आखतवाड़ा था। राजपूत समाज के पूर्वजों के प्रथम पड़ाव स्थल पर ही शिव मंदिर का निर्माण किया गया है। यह मंदिर काफी प्राचीन है। यह मंदिर 12वी सदी का बना हुआ है। हाल ही में समिति द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है।
इस शिव मंदिर में आगामी 10 मार्च को भगवान शिव का रुद्राभिषेक एवं मंदिर प्रांगण में विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा। शिव मंदिर भंडारा आयोजन समिति के नितिन मिश्रा अधिवक्ता ने बताया कि महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर बैतूल में जिले में पधारे सभी शिव भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। समिति द्वारा यहां विगत 3 वर्षों से विशाल भंडारा का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष लगभग 10 हजार श्रद्धालुओं के लिए भंडारा प्रसादी की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस धार्मिक आयोजन में आसपास के ग्राम के हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। अधिवक्ता श्री मिश्रा ने बताया कि 10 मार्च रविवार को सुबह 10 बजे से 11 बजे तक रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे से विशाल भंडारा आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि खेड़ी से उत्तर दिशा में एक किलोमीटर की दूरी पर आखतवाड़ा में यह प्राचीन शिव मंदिर स्थित है। यह स्थल राजपूत शूरवीरों का प्रथम पड़ाव स्थल माना जाता है। राजपूताना इतिहासकारों के अनुसार मुगल काल में राजपूत शूरवीर धर्म की रक्षा के लिए राजस्थान से मध्य प्रदेश की ओर आए थे। खेड़ी सांवलीगढ़ के पास आखतवाड़ा राजपूत पूर्वजों का प्रथम पड़ाव स्थल माना जाता है। समिति द्वारा प्रतिवर्ष यहां विशाल भंडारा का आयोजन किया जाता है।




