तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग
शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


बैतूल। मध्यप्रदेश में सेवारत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में शिक्षक संयुक्त मोर्चा बैतूल ने बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा जारी परीक्षा संचालन नियम पुस्तिका में टीईटी की अनिवार्यता संबंधी प्रावधानों को सेवारत शिक्षकों के हितों के विपरीत बताते हुए तत्काल समाप्त करने की मांग की।
शिक्षकों ने ज्ञापन में कहा कि वे लंबे समय से शासकीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं और अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में सेवारत शिक्षकों के लिए दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू करना उचित नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि इससे उन पर अनावश्यक मानसिक एवं प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा।
– तमिलनाडु की तर्ज पर विधेयक लाने की मांग.
शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विधानसभा में विशेष विधेयक के माध्यम से शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने की पहल की गई है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार से भी आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक लाकर सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग की गई है।
ज्ञापन सौंपने वालों में राज्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष सचिन राय, राज्य अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष भी धोटे, भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष पंजाबराव गायकवाड़, रवि सरनेकर, आदर्श शिक्षक संघ जिला अध्यक्ष राजेंद्र कटारे, ट्राइवल वेलफेयर समिति जिला अध्यक्ष प्रवीण नरवरे, चिचोली से आशीष भुसारी पटेल, लीलाधर नागले, रमेश बारस्कर, शैलेंद्र बिहारिया मनोज आर्य, गंगाराम घुड़ाले, रवि कुमार अतुलकर, बेनी प्रसाद सुरजाए, समग्र शिक्षक संघ बैतूल के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद साहू, नारायण सिंह नगदे, अजाब राव, अतुल आर्य, गीता खातकर, शिमला इवने, अंजनी पवार, तुलसी अनघोरे, अनीता इवने, सरिता मन्नासे, दिलीप वरवडे, मनोज आर्य, शंकरराव बिहारे, चक्रधारी सालवे, सुम्मनलाल भरतपुरे, सुरेंद्र यादव, सुभाष बागड़े सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों के नाम शामिल हैं।
इसके अलावा श्रीराम पाटनकर, मंगलमूर्ति पाटनकर, सुनील पंडाग्रे, बबन राव वाघमारे, विनीत कुमार पाटिल, कमलेश डेंगे, सोमा कुमरे सहित अनेक शिक्षक शामिल रहे।
शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सेवारत शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए टीईटी की अनिवार्यता संबंधी प्रावधानों को वापस लिया जाए और आगामी विधानसभा सत्र में इस संबंध में आवश्यक विधायी पहल की जाए।




