संगठन की माइक्रो-प्लानिंग से बदली बैतूल कांग्रेस की तस्वीर, ऐसा रहा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष निलय डागा के एक साल का संगठन मॉडल

आज 19 अगस्त को जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा के पदभार ग्रहण किए पूर्ण हो जाएगा एक वर्ष, संगठन सृजन के जरिए एक साल में बूथ से जिला स्तर तक 24000 सदस्यों को मुख्य धारा से जोड़ा

बैतूल। कांग्रेस की राजनीति में अक्सर किसी नेता की सक्रियता का पैमाना उसके आंदोलनों और धरना-प्रदर्शनों से लगाया जाता है, लेकिन बैतूल में जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा के एक साल के कार्यकाल की कहानी इससे कहीं आगे जाती है। 16 अगस्त को उनके कार्यकाल का एक वर्ष पूरा हुआ, जबकि 19 अगस्त को पदभार ग्रहण किए उन्हें ठीक एक वर्ष आज पूर्ण हो जाएगा।

आज एक वर्ष पूरा होने पर उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी तस्वीर सड़क पर हुए आंदोलनों से ज्यादा जमीन पर खड़े किए गए संगठन की है। 1758 बूथों पर बीएलए-2 की नियुक्ति से लेकर 134 मंडलम, 554 पंचायत और 192 नगरीय वार्डों तक संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय की गईं और करीब 24 हजार सक्रिय सदस्यों को संगठन की मुख्यधारा से जोड़ा गया। यानी कांग्रेस को केवल चुनाव और आंदोलन के समय सक्रिय रहने वाले ढांचे से निकालकर लगातार गांव, पंचायत और बूथ स्तर पर मौजूद रहने वाले संगठन के रूप में खड़ा करने की कोशिश हुई।

निलय डागा के एक साल को केवल धरना-प्रदर्शन की राजनीति के चश्मे से देखना इस कार्यकाल की पूरी तस्वीर नहीं होगी। जिला अध्यक्ष ने संगठन को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया। गांव, पंचायत, मंडलम, सेक्टर और बूथ स्तर की स्थिति को समझते हुए जिम्मेदारियां तय की गईं और संगठनात्मक इकाइयों को सक्रिय करने पर जोर दिया गया।

यही वजह रही कि संगठन सृजन अभियान केवल नियुक्तियों की सूची तक सीमित नहीं रहा। 1758 बूथों पर बीएलए-2 नियुक्त किए गए, 29 ब्लॉकों में अध्यक्षों सहित 21 सदस्यीय कमेटियां गठित की गईं और 134 मंडलमों में नियुक्तियां की गईं। 554 पंचायतों में पुरुष और महिला अध्यक्षों की अलग-अलग तैनाती तथा नगरीय क्षेत्र के 192 वार्डों में अध्यक्षों की नियुक्ति की गई। इस पूरी कवायद के जरिए 24 हजार सक्रिय सदस्यों को संगठन से जोड़ा गया।

– बूथ तक पहुंची कांग्रेस की राजनीति

किसी भी राजनीतिक दल की असली ताकत उसके बूथ संगठन से तय होती है। इसी स्तर पर निलय डागा ने सबसे ज्यादा जोर दिया। कांग्रेस के जिलेभर में फैले संगठनात्मक ढांचे को सक्रिय करने के लिए बूथ से लेकर जिला स्तर तक जिम्मेदारियां बांटी गईं। इसका सबसे बड़ा प्रदर्शन तब दिखाई दिया, जब जिले के सभी 1758 बूथों पर एक साथ कांग्रेस का स्थापना दिवस मनाया गया।

यह आयोजन सिर्फ पार्टी का स्थापना दिवस मनाने की कवायद ही नहीं रहा, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन की मौजूदगी दिखाने का अवसर भी बना। कांग्रेस के लिए यह संदेश देने की कोशिश थी कि संगठन अब केवल जिला मुख्यालय या बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है।

– 24 हजार सदस्यों का नेटवर्क

निलय डागा के कार्यकाल में तैयार किए गए संगठनात्मक आंकड़े भी इस विस्तार की तस्वीर पेश करते हैं। जिले की पांचों विधानसभाओं में ब्लॉक, मंडलम, सेक्टर, पंचायत और बूथ कमेटियों के गठन के साथ संगठन को अंतिम पंक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

29 ब्लॉकों में 21 सदस्यीय कमेटियां, 134 मंडलमों में नियुक्तियां, 554 पंचायतों में पुरुष और महिला अध्यक्ष तथा 192 नगरीय वार्डों में अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद करीब 24 हजार सक्रिय सदस्यों को संगठन की मुख्यधारा से जोड़ा गया। इस नेटवर्क का उद्देश्य केवल चुनावी समय में सक्रिय होना नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों को लगातार चलाना है।

– कार्यकर्ताओं के लिए अपना भवन भी जल्द होगा तैयार

संगठन को स्थायी आधार देने की दिशा में जिला कांग्रेस कार्यालय का निर्माण भी महत्वपूर्ण कदम है। बैतूल में 11,680 और 3,600 वर्ग फीट जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराकर बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया गया। जिला कांग्रेस भवन के लिए निलय डागा ने अपनी ओर से 21 लाख रुपये की दान राशि देने की घोषणा की।

कांग्रेस के लिए यह लंबे समय से कार्यकर्ताओं का सपना रहा है। अब इसे संगठन के स्थायी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया गया है। यहां से संगठनात्मक गतिविधियों, बैठकों और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को संचालित करने की तैयारी है।

– सड़क पर भी सरकार को घेरा

संगठन मजबूत करने के साथ निलय डागा के नेतृत्व में कांग्रेस ने जनहित के मुद्दों पर सड़क पर भी संघर्ष किया। तिरंगे के अपमान, वोट चोर गद्दी छोड़ो अभियान और कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किए गए।

अधूरे राष्ट्रीय राजमार्ग पर टोल वसूली के विरोध में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का घेराव किया गया। किसानों और छात्रों की समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव हुआ। आदिवासियों पर अत्याचार, नीट पेपर लीक और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के खिलाफ भी प्रदर्शन किए गए।

दूषित पानी से मौतों और शहर के जल संकट को लेकर नगर पालिका का घेराव भी किया गया। यानी संगठन को जमीन पर खड़ा करने के साथ जनहित के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने की रणनीति भी जारी रही।

– संगठन विस्तार के साथ दिया प्रशिक्षण

संगठन विस्तार के साथ उसकी राजनीतिक समझ और कार्यशैली को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। जिले में पहली बार 134 मंडलम और ब्लॉक अध्यक्षों के लिए आवासीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य पदाधिकारियों को संगठनात्मक जिम्मेदारियों और राजनीतिक गतिविधियों के लिए तैयार करना रहा।

जिला समन्वय समिति की नियमित बैठकों के जरिए पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई। इससे संगठन के भीतर समन्वय बढ़ाने और एकजुट कांग्रेस का संदेश देने पर जोर रहा।

– विचारधारा को भी गांव तक ले जाने की कोशिश

निलय डागा के नेतृत्व में कांग्रेस ने महापुरुषों की जयंतियों और पुण्यतिथियों को भी व्यापक स्तर पर मनाया। इन आयोजनों को केवल औपचारिक कार्यक्रम के बजाय कांग्रेस की विचारधारा को आम लोगों तक पहुंचाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया।

राष्ट्रीय नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर भी जिले में सक्रियता दिखाई गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान के विरोध में सत्याग्रह मार्च आयोजित किया गया। वहीं 1758 बूथों पर पहली बार कांग्रेस स्थापना दिवस मनाने की कवायद ने राष्ट्रीय और स्थानीय संगठन के बीच तालमेल का संदेश दिया।

निलय डागा के एक वर्ष के कार्यकाल की सबसे अहम उपलब्धि के तौर पर संगठन का बूथ तक विस्तार सामने आता है। आंदोलन कांग्रेस की राजनीति का एक हिस्सा रहा, लेकिन उसके साथ गांव-गांव जाकर कार्यकर्ताओं को जोड़ना, जिम्मेदारियां तय करना, कमेटियों का गठन करना, प्रशिक्षण देना और स्थायी कार्यालय की दिशा में काम करना इस कार्यकाल को केवल आंदोलन आधारित राजनीति से अलग तस्वीर देता है।

श्री डागा का 1 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के साथ बैतूल कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस तैयार संगठनात्मक ढांचे को लगातार सक्रिय बनाए रखने की होगी। 1758 बूथ, 134 मंडलम, 554 पंचायत, 192 वार्ड और 24 हजार सक्रिय सदस्यों का यह नेटवर्क यदि लगातार जमीन पर सक्रिय रहता है, तो यही निलय डागा के एक वर्ष के कार्यकाल की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा और उपलब्धि दोनों साबित होगी।

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