आदिवासी समाज रत्न से सम्मानित हुए डॉ. मनोज मडावी
साहित्य, समाज और शिक्षा में योगदान के लिए मिली पहचान

बैतूल। आदिवासी साहित्य, समाज और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज मडावी को सावनेर में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस सांस्कृतिक सम्मेलन में आदिवासी समाज रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान गोंडवाना रिसर्च फाउंडेशन और गोंडवाना युवा समिति द्वारा आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया।
डॉ. मनोज मडावी को यह पुरस्कार आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को साहित्य के माध्यम से संरक्षित और प्रचारित करने, समाज के उत्थान और आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए निरंतर किए जा रहे सामाजिक प्रयासों को मान्यता देने और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्तापूर्ण अध्यापन के लिए प्रदान किया गया। गोंडवाना रिसर्च फाउंडेशन और गोंडवाना युवा समिति के इस समर्पित प्रयास से आदिवासी संस्कृति के संरक्षण में लगे कार्यकर्ताओं और विद्वानों को एक नई प्रेरणा मिली है। अपने प्रबोधन में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज मडावी ने समाज के सामने एक नई वैचारिक दिशा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को वैज्ञानिक और साहित्यिक दृष्टिकोण की ओर अग्रसर होना होगा। यह आज के युग की अनिवार्यता है और युवा पीढ़ी के लिए यह नया आदर्शवाद है।
प्रो. मडावी ने कहा कि आदिवासी समाज के समग्र विकास के लिए तीन मूलभूत तत्व आवश्यक हैं पहला, तर्कसंगत सोच और अनुसंधान प्रवृत्ति का विकास जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ता है। दूसरा, प्रौद्योगिकी के उपयोग में दक्षता जिससे आदिवासी युवा डिजिटल युग में मजबूती से आगे बढ़ सकें। और तीसरा, भाषा, संस्कृति और साहित्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए नवीन विचारों को अपनाना है।





