टीईटी अनिवार्यता खत्म करने शिक्षकों ने सौंपा ज्ञापन।
डेढ़ लाख शिक्षकों पर टीईटी का दबाव हटाने की मांग, सरकार से आदेश निरस्त करने की अपील।

बैतूल। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा जिला बैतूल ने शनिवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग शिक्षकों के लिए अनिवार्य की जा रही टीईटी परीक्षा को तत्काल निरस्त करने की रही, जिससे प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को राहत मिल सके।
मोर्चा ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 2 मार्च तथा जनजाति कार्य विभाग द्वारा 26 मार्च को जारी आदेशों से शिक्षकों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बढ़ा है, इसलिए इन्हें तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों के पक्ष में राज्य शासन से पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग भी उठाई गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि अध्यापक शिक्षक संवर्ग को पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण का लाभ प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना करते हुए दिया जाए। इसके अलावा शिक्षा विभाग और जनजाति कार्य विभाग के बीच स्थानांतरित शिक्षकों को उनके मूल विभाग के आधार पर क्रमोन्नति का लाभ देने की मांग की गई।
साथ ही अध्यापक शिक्षक संवर्ग को पुरानी पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश के नगदीकरण और प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता का लाभ देने, तथा शिक्षा विभाग और जनजाति कार्य विभाग के बीच स्थानांतरित शिक्षकों को क्रमोन्नति का लाभ प्रदान करने की मांग की गई। मांगें पूरी नहीं होने पर शिक्षकों ने 18 अप्रैल को भोपाल जाकर आंदोलन तेज करने का संकल्प भी लिया।
इस दौरान संयुक्त मोर्चा के संयोजक विनय सिंह राठौर, रवि सरनेकर, पंजाब गायकवाड़, भीम धोटे, मदन डढोरे, राजेंद्र प्रसाद साहू, लक्ष्मीचंद लिल्लोरे, सुषमा तिवारी, राजू मालवी, महेंद्र भारती, दिनेश वर्मा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।




