ब्रह्माण्ड की आधार शक्ति हैं दस महाविद्याएं, गुरु-दीक्षा से जागृत होती है कुंडलिनी : देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी

खेड़ीकोर्ट में सैकड़ों भक्तों ने ली मां बगलामुखी मंत्र दीक्षा


बैतूल। खेड़ीकोर्ट में मां बगलामुखी की सिद्ध साधिका परम पूज्य गुरुमाता देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी के पावन सान्निध्य में आयोजित मां बगलामुखी साधना एवं गुरु-दीक्षा शिविर का आध्यात्मिक वातावरण में भव्य समापन हुआ। क्षेत्र सहित दूर-दराज से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मां भगवती पीताम्बरा देवी की विधिवत गुरु-दीक्षा ग्रहण की।
शिविर को संबोधित करते हुए गुरुमाता देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर अपार दिव्य शक्ति का समुद्र है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने और जागृत करने की है। उन्होंने बताया कि गुरु-दीक्षा से साधक की सुप्त शक्तियां जागृत होती हैं और वह आत्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है। शास्त्रों में वर्णित बीज मंत्र पंचतत्वों से युक्त होते हैं, जिन्हें सिद्ध गुरु परंपरा से प्राप्त किया जाता है। विधिपूर्वक जप से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है, सातों चक्र सक्रिय होते हैं और आत्मज्ञान की अनुभूति प्रारंभ होती है।
उन्होंने कहा कि मां बगलाभवानी की साधना से साधक के भीतर आत्मबल, कुलदेवी की शक्ति और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है, जिससे जीवन में स्थिरता, शांति और सकारात्मक परिवर्तन आता है। गुरुमाता ने दस महाविद्याओं काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये शक्ति के विविध स्वरूप हैं, जो भय, अज्ञान और आसक्ति का नाश कर साधक को आत्मबोध की ओर ले जाते हैं। वर्तमान तनावपूर्ण जीवन में महाविद्याओं का ज्ञान संतुलन, धैर्य और आध्यात्मिक स्थिरता प्रदान करता है। शास्त्रों के अनुसार शक्ति और शिव का संयोग ही सृष्टि का आधार है और साधना से इसका अनुभव संभव है।
– शक्तिपात केवल गुरुकृपा से संभव
गुरुमाता देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी ने गुरु-शिष्य परंपरा पर कहा कि शक्तिपात केवल गुरुकृपा से संभव है और यह शिष्य की श्रद्धा, सेवा तथा पात्रता से प्राप्त होता है। शक्तिपात के माध्यम से गुरु अपनी साधनाओं और सिद्धियों का सार शिष्य में संचारित कर उसे आत्मोन्नति के योग्य बनाते हैं। शिविर में मंत्र-साधना, गुरु-दीक्षा और आध्यात्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ, जिससे वातावरण भक्तिमय और ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। श्रद्धालुओं ने इसे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला अनुभव बताते हुए कृतज्ञता व्यक्त की।
– कथित लोक-विद्याओं के कारण आम जनमानस भयभीत
मां बगलामुखी साधना शिविर आयोजन समिति के संयोजक मां बगलामुखी साधक आचार्य रविन्द्र मानकर ने कहा कि ग्रामीण अंचलों में तंत्र-मंत्र और यंत्र के नाम पर प्रचलित कथित लोक-विद्याओं के कारण आम जनमानस मानसिक रूप से परेशान और भयग्रस्त हो रहा है। छोटी पारिवारिक, स्वास्थ्य या आर्थिक समस्याओं को तंत्र प्रयोग से जोड़कर डर का माहौल बनाया जाता है, जिससे सामाजिक शांति प्रभावित होती है। आचार्य रविन्द्र मानकर ने बताया कि इंद्रजाल, खुसरी माता, तोड़े-तोड़, मिर्चक दीवार, नजर-बांध, मन-बांध, गृह-बाधा और व्यापार बाधा जैसे नामों का उपयोग कर लोगों को भयभीत किया जाता है, जिससे परिवारों में तनाव और मानसिक अस्थिरता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि इनसे सुरक्षा के लिए प्रत्येक व्यक्ति को मां बगलामुखी दीक्षा लेकर साधना करना चाहिए।

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