Folk artist Mahadev Barskar honored: जनजातीय संग्रहालय में बैतूल के कलाकारों ने गडली सुसुन नृत्य की दी शानदार प्रस्तुति

जनजातीय संग्रहालय में बैतूल के कलाकारों ने गडली सुसुन नृत्य की दी शानदार प्रस्तुति
लोक कलाकार महादेव बारस्कर हुए सम्मानित
जनजातीय संग्रहालय की वर्षगांठ पर बैतूल की कोरों सुसुन टीम ने बिखेरा कोरकू कला का सौंदर्य
बैतूल। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय भोपाल की स्थापना के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 6 से 10 जून तक आयोजित किए जा रहे महुआ महोत्सव में 7 जून को बैतूल जिले से आए कोरों सुसुन सांस्कृतिक दल ने कोरकू समुदाय का पारंपरिक गडली सुसुन नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति का नेतृत्व कोरों सुसुन टीम के अध्यक्ष महादेव बारस्कर ने किया, जिनके साथ बैतूल जिले के कई अन्य जनजातीय कलाकारों ने भी सहभागिता निभाई।
कोरकू जनजाति की संस्कृति को मंच पर जीवंत करते हुए इस नृत्य में पारंपरिक वाद्य, गीत, वेशभूषा और सामूहिक नृत्य की अद्भुत झलक देखने को मिली। इस अवसर पर जनजातीय संग्रहालय भोपाल के निदेशक डॉ धर्मेंद्र पारे ने महादेव बारस्कर को कोरकू गडली सुसुन नृत्य के संरक्षण, संवर्धन और कोरकू संस्कृति को निरंतर जनमानस तक पहुंचाने के उनके प्रयासों के लिए पुष्पगुच्छ और प्रमाण पत्र भेंट कर सम्मानित किया। महुआ महोत्सव में मध्यप्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र के भी जनजातीय नृत्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इस अवसर पर गोण्ड, भील, बैगा और कोरकू जनजातियों के व्यंजन, शिल्प मेला, कठपुतली का खेल और लोककला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है, जिसने उत्सव को बहुरंगी सांस्कृतिक छटा में रंग दिया। सम्मान प्राप्त करने के उपरांत महादेव बारस्कर ने भोपाल जनजातीय संग्रहालय के निदेशक डॉ धर्मेंद्र पारे का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें अपना मार्गदर्शक और गुरु बताया। उन्होंने कहा कि जनजातीय कलाओं को इस प्रकार मंच मिलने से संस्कृति के संरक्षण को भी मजबूती मिलती है।





