विकसित भारत के लिए टेक्नोलॉजी का सदुपयोग जरूरी।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर क्विज, मॉडल, पोस्टर और रंगोली प्रतियोगिता आयोजित।

 

बैतूल। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस जेएच कॉलेज बैतूल में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के द्वितीय सत्र में विज्ञान और विकसित भारत की अवधारणा को केंद्र में रखकर सीधे संवाद का मंच सजा, जहां प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी चौबे के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश काऊंसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी भोपाल के अंतर्गत समन्वयक डॉ. महेन्द्र नावंगे, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के नेतृत्व में तथा प्रो. अर्चना सोनारे विभागाध्यक्ष बॉटनी एवं माइक्रोबायोलॉजी के निर्देशन में क्विज प्रतियोगिता, साइंटिफिक मॉडल, पेंटिंग, पोस्टर मेकिंग और रंगोली जैसी गतिविधियों के माध्यम से 180 विद्यार्थियों ने विज्ञान के प्रति अपनी जिज्ञासा और प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जूलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. बी. डी. नागले ने की। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान में रुचि विकसित करने, जिज्ञासाओं के समाधान खोजने तथा नेट और सेट जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित किया। शासकीय विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हर्षवर्धन यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि 1950 के संविधान में ही महिलाओं की विज्ञान के हर क्षेत्र में भागीदारी का भाव निहित है, महिलाओं के बिना विज्ञान अधूरा है।

डॉ. अल्का पाण्डेय, रिटायर प्रोफेसर बॉटनी ने कहा कि विकसित भारत का सपना सबसे पहले डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने देखा था और वर्तमान में भारत सरकार उसे साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 की थीम वूमन इन साइंस कैटालाइजिंग विकसित भारत के अनुरूप उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी में वैक्सीन के आविष्कार और इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली गगनदीप कांग, निवेदिता गुप्ता, प्रिया अब्राहम, प्रज्ञा यादव और सुचित्रा एला के योगदान की जानकारी दी तथा विद्यार्थियों को टेक्नोलॉजी के सदुपयोग के लिए प्रेरित किया।

डॉ. नवीन वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर बॉटनी, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय छिंदवाड़ा ने विज्ञान को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ते हुए अभूतपूर्व जानकारी दी। डॉ. रूपेश कपाले, असिस्टेंट प्रोफेसर बॉटनी, शासकीय पंचवली महाविद्यालय जुन्नारदेव ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोइन्फॉर्मेटिक्स के क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. महेन्द्र नावंगे ने दोनों सत्रों का सार प्रस्तुत किया।

– विभिन्न प्रतियोगिताओं का किया आयोजन

प्रतियोगिताओं में पेंटिंग में तृतीय स्थान वैजन्ती मर्सकोले, द्वितीय याशिका माकोड़े और प्रथम महक शेख को मिला। पोस्टर मेकिंग में तृतीय स्थान भावना, रुचि, स्नेहा और डिंपी प्रजापति को, द्वितीय स्थान शारदा बनकर, हर्षिता सराठे और महक को तथा प्रथम स्थान प्रांजल वर्मा को मिला। रंगोली में तृतीय स्थान दिशा सराठे, कोमल शनिसरे और लीना बारमासे को, द्वितीय स्थान शोभा सोलंकी, संजना वागद्रे, पल्लवी श्वेता और नीलिमा को तथा प्रथम स्थान भुवनेश्वरी अहाके, छाया धुर्वे और देवेन्द्र मगरदे को मिला।

क्विज प्रतियोगिता में तृतीय स्थान भुवनेश्वरी और द्वितीय स्थान प्रांजल ने प्राप्त किया। साइंटिफिक मॉडल में तृतीय स्थान रेनुका मस्कोले और पायल धुर्वे को, द्वितीय स्थान कंचन इवने को तथा प्रथम स्थान महक शेख और नीतू मरकाम को प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का संचालन दीपिका साहू ने किया, आभार प्रो. दीपिका सोनारे ने तथा समापन आभार प्रो. अर्चना सोनारे ने व्यक्त किया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. पंकज बारस्कर, डॉ. राहुल सिंह ठाकुर, डॉ. प्रीतिबाला पाल, प्रो. राकेश पवार, प्रो. सोनम पाल, प्रो. संतोष पवार, सोनम चौधरी, प्रोफेसर चंद्रशैली यादव और सतीश वाडिवा की सक्रिय भूमिका रही।

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