अमरावती का रुद्रावतार ढोल-ताशा पथक बनेगा शिव बारात की धड़कन, 50 कलाकारों के साथ गूंजेगी गर्जना

बैतूल। अमरावती का गौरवशाली रुद्रावतार ढोल-ताशा पथक इस बार थाना महाकाल चौक से निकलने वाली शिव बारात का मुख्य आकर्षण रहेगा और अपने 50 सदस्यों के साथ बैतूल में ढोल-ताशा की ऐसी गर्जना करेगा, जिसकी गूंज दूर तक सुनाई देगी।

शिव बारात समिति के संदीप कौशिक ने बताया कि रुद्रावतार ढोल-ताशा पथक वर्तमान में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हैदराबाद, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों पर अपने जोशीले और पारंपरिक वादन से लोगों का उत्साह दोगुना कर रहा है। यह पथक हर आयोजन को ऊर्जा और अनुशासन से भर देता है।

हनुमान जयंती में वीरश्रीपूर्ण वादन, राम नवमी की शोभायात्राओं में रामभक्ति का संचार, गणेशोत्सव में बप्पा के स्वागत की ऊर्जावान ताल और नवरात्रोत्सव में देवी-स्तुति तथा गरबा-डांडिया की पृष्ठभूमि में गूंजता ढोल रुद्रावतार पथक ने हर मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। ढोल-ताशा की लय के माध्यम से यह दल धर्म, परंपरा और संस्कृति का सजीव दर्शन कराता है।

मध्य प्रदेश में इंदौर, खरगोन, बुरहानपुर और भोपाल जैसे शहरों में इस पथक ने मराठी संस्कृति का भव्य प्रदर्शन किया है। जहां-जहां इस दल ने प्रस्तुति दी, वहां पर्व ऐतिहासिक बन गया। अब यही ऊर्जा बैतूल की शिव बारात में दिखाई देगी।

– भीमाशंकर के नाम से सजा मंडप

इधर शिव विवाह उत्सव के अंतर्गत परंपरागत रस्मों का क्रम भी जारी है। महाशिवरात्रि पर्व के अंतर्गत चल रहे शिव विवाह उत्सव में बुधवार को भीमाशंकर के नाम से मंडप सजाने की परंपरागत रस्म संपन्न हुई। पारंपरिक विधि-विधान से मंडप स्थापना की गई, जिसमें मांगलिक गीतों, पूजा-अर्चना और वैवाहिक संस्कारों की प्रारंभिक रस्में निभाई गईं। मंडप में गणेश पूजन, कलश स्थापना और मंगलाचरण के साथ विवाह संबंधी कार्यक्रमों का क्रम आगे बढ़ाया गया।

– काशी विश्वनाथ के नाम से आज होगी हल्दी

समिति के सुधीर मालवी ने बताया कि आज 12 फरवरी गुरुवार को हल्दी की रस्म आयोजित की जाएगी। हल्दी आयोजन की जिम्मेदारी सोनम मिश्रा, सोनल पाटिल, रानी राठौर, माधुरी नामदेव, शिखा कौशिक, कंचन मिश्रा, माधवी सोनी, बिल्लो पवार, रीता दत्ता, आयुषी नामदेव, मुस्कान घोड़पे, नीता वराठे, निर्मला यादव, सरिता श्रीवास्तव, कशिश तातेड़ और माधुरी पवार को सौंपी गई है। समिति के अनुसार यह रस्म भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न की जाएगी।

वैवाहिक परंपरा के अनुसार भगवान शिव को प्रतीकात्मक रूप से हल्दी अर्पित की जाएगी और मंगल गीतों के बीच इस संस्कार को विधि-विधान से संपन्न किया जाएगा। श्रद्धालु पीले वस्त्रों और पारंपरिक परिधानों में शामिल होकर शिव-पार्वती विवाह की इस महत्वपूर्ण रस्म के साक्षी बनेंगे।

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