बिना वैध लेन-देन धारा 138 लागू नहीं: अधिवक्ता भारत सेन।
कोर्ट ने कहा– कागजी ट्रांजेक्शन पर कार्रवाई नहीं, व्यापारियों को सावधानी और सही रिकॉर्ड रखने की सलाह।

बैतूल। जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों के लिए एक अहम कानूनी पहलू सामने आया है, जिसमें फर्जी टैक्स इनवॉइस के आधार पर दर्ज चेक बाउंस मामलों को अदालत में टिकाऊ नहीं माना जा रहा है। जिला न्यायालय बैतूल के अधिवक्ता भारत सेन के अनुसार, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 तभी लागू होती है जब चेक किसी वैध ऋण या कानूनी दायित्व के भुगतान के लिए दिया गया हो।
यदि इनवॉइस फर्जी है और उसके पीछे कोई वास्तविक माल या सेवा की सप्लाई नहीं हुई, साथ ही वह जीएसटीआर-1 या जीएसटीआर-3बी में दर्ज नहीं है, तो ऐसे मामलों में कोई वैध देनदारी बनती ही नहीं। इस स्थिति में चेक बाउंस का केस अदालत में टिक नहीं पाता और आरोपी को राहत मिल सकती है।
जीएसटी पोर्टल के रिकॉर्ड ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य बनकर उभरे हैं। जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-3बी और जीएसटीआर-2बी के बीच मिसमैच यह साबित करता है कि लेन-देन केवल कागजों में हुआ है। साथ ही ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और बैंक स्टेटमेंट भी अदालत में अहम भूमिका निभाते हैं।
अधिवक्ता सेन ने बताया कि एनआई एक्ट की धारा 139 के तहत चेक को वैध ऋण के लिए माना जाता है, लेकिन इसे साक्ष्यों के आधार पर खारिज किया जा सकता है। ट्रायल के दौरान जीएसटी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत कर आरोपी अपनी बेगुनाही साबित कर सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फर्जी इनवॉइस का उपयोग करने वाले व्यापारियों पर जीएसटी कानून की धाराओं के तहत भारी जुर्माना, ब्याज और जेल की कार्रवाई भी हो सकती है।
व्यापारियों को सलाह दी गई है कि वे हर इनवॉइस का जीएसटी पोर्टल पर सत्यापन करें, डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दें और सभी रिकॉर्ड व्यवस्थित रखें। सही अनुपालन और पारदर्शिता ही ऐसे कानूनी विवादों से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है।




