नन्हीं बच्चियों की इबादत ने जीता दिल, कम उम्र में पूरा किया रोजा।

नन्हीं उम्र में इबादत से दिया सब्र और अनुशासन का संदेश ।  सभी धर्मों के लोगों के लिए मांगी अमन, शांति और भाईचारे की दुआ ।

बैतूल। रमजान के पाक महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग इबादत में लगे हैं, वहीं छोटी उम्र के बच्चों में भी रोजे के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर की नन्हीं बच्चियों अश्मीरा फातिमा 7 वर्ष, इलमा फातिमा 5 वर्ष और अनबिया फातिमा 4 वर्ष ने रोजा रखकर सभी को प्रभावित किया। यह तीनों सगी बहनों ने पूरे उत्साह के साथ रोजा रखा और दिनभर इबादत में समय बिताया। बच्चियों ने बताया कि उन्होंने रोजा रखकर सभी धर्मों के लोगों के लिए अमन, शांति और भाईचारे की दुआ मांगी।

तीनों बच्चियां भीम आर्मी सह संयोजक नर्मदापुरम अलीमुद्दीन के छोटे भाई सलीमुद्दीन की बेटियां हैं। परिवार में धार्मिक माहौल के बीच बच्चियों ने छोटी उम्र में ही रोजे की अहमियत को समझते हुए इसे निभाया।

परिजनों के अनुसार तीनों बच्चियों ने बिना किसी कठिनाई के रोजा पूरा किया और पूरे दिन सब्र और अनुशासन के साथ रहीं। इतनी कम उम्र में रोजा रखने की उनकी लगन ने परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी प्रभावित किया।

उल्लेखनीय है कि रमजान में रोजा इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक माना जाता है, जो आत्मसंयम, सब्र और इबादत का संदेश देता है। कम उम्र में बच्चों का इस तरह रोजे के प्रति समर्पण परिवार में मिल रहे संस्कारों और धार्मिक माहौल को दर्शाता है।

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