Dhuni has been burning continuously for 92 years: यहां 92 वर्ष से अनवरत जल रही है दादाजी की धूनी, छोटे दादा जी ने की थी प्रज्वलित
गुरु पूर्णिमा पर हर साल होता है टिक्कड़-चटनी का वितरण

बैतूल। दादा धुनी कुटी खंजनपुर में गुरूपूर्णिमा पर्व पूरी भक्ति भाव से मनाया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का कुटी पहुंचकर पूजा अर्चना करने का सिलसिला शुरू हो गया था। पूरा परिसर भजलो दादा जी का नाम, भजलो हरिहर जी का नाम से गूंज उठा था। यहां पहुंचे श्रद्धालुओं को टिक्कड़ ,चटनी और हलवा का प्रसाद दिया गया। यहॉ लगाए सीसीटीवी से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी।

— श्रद्धालुओं को बांटा टिक्कड़-चटनी का प्रसाद–
दादा धुनी कुटी खंजनपुर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रवीण पम्मू भावसार ने आज बताया कि गुरूपूर्णिमा पर्व पर सुबह आठ बजे विशेष आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण शुरू कर दिया था, जो देर रात तक चलते रहा। श्रद्धालुओं को करीब 13 क्विंटल आटे से बना टिक्कड़, एक क्विंटल की चटनी के अलावा करीब ढाई क्विंटल बना हलवा प्रसाद के तौर पर वितरित किया गया। दोपहर में बैतूलबाजार से बड़ी संख्या में कुटी आए दादा भक्तो ने निशान चढ़ाया। शाम को महाआरती की गई। हजारों की संख्या में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं को कुटी तक आसानी से आने के लिए बेरिकेट लगाकर महिला एवं पुरूषों की अलग अलग कतार की व्यवस्था बनाई गई थी। बारिश को देखते हुए वाटर प्रूफ टेंट लगाए गए थे।

— 92 वर्ष से अनवरत जल रही है धूनी–
ट्रस्ट के प्रफुल्ल सायरे ने बताया कि दादा जी 1930 में खंजनपुर कुटी में रूके थे. 1932 में अंग्रेज कमिश्नर जे.सी.बरौनी ने गुरू पूर्णिमा पर कुटी का निर्माण किया था। तब से 92 वर्षो से यहां पर अनवरत धूनी जल रही है। श्रद्धालुओं के लिए कुटी आस्था का केंद्र बन गया है। यहां पहुंचे 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को टिक्कड़, चटनी और हलवा का प्रसाद बांटा गया। पुलिस ने मुस्तैदी से मोर्चा संभालकर व्यवस्ता बनाने में सहयोग दिया। भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से कुटी के सामने से चौपहिया एवं दो पहिया वाहनों का प्रवेश बंद कर अन्य मार्ग से वाहनों की आवाजाही की गई।




