Corruption: महंगा सामान खरीदने के लिए कुख्यात हुआ एकलव्य आवासीय परिसर
100 रुपये का स्कूल बैग 360 रुपये में खरीदा, बेडशीट के साथ फ्री मिलने वाले पिलो कवर की भी चुकाई कीमत

बैतूल। स्वहित साधने के चक्कर में कुख्याति की हद पार कर देने वाले एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय प्रबन्धन ने बाजार मूल्य से अधिक कीमतों पर खरीदी किये जाने के सारे रिकार्ड तोड़ रखे हैं। हद तो तब हो गई जब परिसर का प्रबन्धन चलाने वाले भ्रष्टाचारियों ने बाजार में मिलने वाला स्कूल बैग 3 गुना ज्यादा दाम चुकाकर खरीद लिए। शासन के करोड़ों रुपयों को चूना लगाने के लिए बेडशीट के साथ फ्री मिलने वाले तकिया कवर की भी कीमत लगभग दो गुनी चुकाई गयी है। लेकिन इतना सब होने के बाद जनजातीय कार्य विभाग की जिम्मेदार अधिकारी का शांत बैठना कहीं ना कहीं उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
— 100 का स्कूल बैग 360 रुपये में खरीदा–
एकलव्य आवासीय परिसर शाहपुर में सरकारी पैसों की बन्दर बांट किये जाने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं दिया गया है। स्कूल बैग की खरीदी में तीन गुना ज्यादा फर्जी वाड़ा किये जाने की जानकारी मिली है। शिकायतकर्ता आदिवासी विकास परिषद अध्यक्ष मुन्ना लाल वाड़ीवा का आरोप है कि आवासीय परिसर का प्रबन्धन संभालने वालों ने आदिवासी बच्चों के हक पर डाका डाला है। उन्होंने बताया कि बाजार में जिस स्कूल बैग की कीमत मात्र 100 रुपये है उसी बैग को प्रबन्धन ने 360 रुपये प्रति नग के हिसाब से खरीदा गया है। लगभग 150 बैग की खरीदी बल्क में किये जाने के बावजूद स्कूल बैग की कीमत 100 रुपये से भी कम हो जाना था लेकिन वित्तीय अनियमितता को अंजाम देने के उद्देश्य से नियम कायदों के साथ साथ भ्रष्टाचारियों ने अपने आत्म सम्मान के साथ-साथ अपने जमीर को भी दांव पर लगा दिया। भ्रष्टाचारियों ने 150 बैग की खरीदी के एवज में ठेकेदार को 54 हजार रुपये चुकाएं हैं। जबकि यही खरीदी बाजार मूल्य के हिसाब से मात्र 15 हजार रुपये में हो सकती थी। ठेकेदार को 39 हजार रुपये का ज्यादा भुगतान किस प्रयोजन के लिए किया गया। ये पैसा कहां कहां, कितना कितना, किस किस को बांटा गया यह जांच का विषय है।
— फ्री मिलने वाले पिलो कवर के चुकाए 38 हजार 631 रुपये–
आमतौर पर ये जग जाहिर है कि बाजार में मिलने वाली बेड शीट के साथ पिलो कवर यानी कि तकिए के कवर बेड शीट के साथ फ्री मिलते हैं। लेकिन प्रबन्धन ने फ्री मिलने वाले पिलो कवर भी नगद में खरीद लिए। शिकायत कर्ता मुन्ना का कहना है कि आवासीय परिसर के लिए 466 पिलो कवर की खरीदी बताई गई है। एक पिलो कवर की कीमत 82 रुपये 90 पैसे दर्शाई गई है। इस हिसाब से ठेकेदार को 38 हजार 631 रुपये का भुगतान किया गया है। इसी तरह 158 पिलो कवर की खरीदी अलग से की गई। यह पिलो कवर 240 रुपये प्रति नग के हिसाब से खरीदा गया है। इसके लिए भी ठेकेदार को 37 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। इस तरह से फ्री मिलने वाले 624 पिलो कवर की खरीदी में ही भ्रष्टाचारियों ने शासन को कुल 49 हजार 101 रुपये का फ़टका लगा दिया।
— 120 की बेडिंग शीट 385 रुपये में खरीदी–
एकलव्य आवासीय परिसर में बेडिंग शीट की खरीदी में ही लगभग 2 लाख रुपये सीधे अंदर किये जाने की जानकारी मिली है। शिकायतकर्ता मुन्ना लाल ने बताया कि प्रबन्धन द्वारा मात्र 100 रुपये कीमत की बेडिंग शीट 385 रुपये प्रति नग के हिसाब से खरीद कर भरस्टाचार के सारे रिकॉर्ड ब्रेक कर दिए गए। 624 बेडिंग शीट की खरीदी के एवज में ठेकेदार को 2 लाख 40 हजार 240 रुपये का भुगतान किया गया है। जबकि बाजार मूल्य के हिसाब से इतनी ही बेडिंग शीट की खरीदी मात्र 46 हजार 200 रुपये में हो सकती थी। सवाल ये है कि बेडिंग शीट की खरीदी में ठेकेदार को 1 लाख 94 हजार 40 रुपये का भुगतान आखिर कैसे कर दिया गया।




