मां कामाख्या महिमा के साथ संपन्न हुई श्रीमद् देवी भागवत कथा।
मां ताप्ती तट पर बन रहा कामाख्या धाम बनेगा आस्था का बड़ा केंद्र।

बैतूल। मुलताई विकासखंड के ग्राम सोनखेड़ी में आयोजित तीन दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा एवं श्री मां पीताम्बरा सहस्त्रनाम महायज्ञ का शनिवार को भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ प्राप्त किया।
कथा के दौरान परम पूज्या मां बगलामुखी सिद्ध साधिका, आत्मज्ञानी, ब्रह्मज्ञानी, दिव्यदृष्टि प्राप्त परम तपस्विनी संत गुरू माता मां देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी जी ने मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन करते हुए विशेष रूप से मां कामाख्या देवी की दिव्य महिमा, शक्ति, साधना और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मां कामाख्या आदिशक्ति जगदम्बा का साक्षात स्वरूप हैं और समस्त शक्तिपीठों की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। मां कामाख्या सम्पूर्ण सृष्टि की सृजन शक्ति, चेतना और मातृशक्ति का प्रतीक हैं तथा जहां सच्ची श्रद्धा, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण होता है, वहां उनकी कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
गुरू माता ने कहा कि मां कामाख्या की उपासना से साधक के जीवन में आत्मबल, आत्मविश्वास, आध्यात्मिक जागृति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां अपने भक्तों के जीवन से भय, निराशा, नकारात्मकता और विभिन्न बाधाओं को दूर कर उन्हें उन्नति, सफलता और कल्याण के मार्ग पर अग्रसर करती हैं। उन्होंने बताया कि शक्ति साधना परंपरा में मां कामाख्या का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है तथा उनकी कृपा से साधक को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और आध्यात्मिक अनुभूति की प्राप्ति होती है। माँ कामाख्या को इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्ति का दिव्य संगम बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी आराधना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है तथा परिवार में सुख, शांति, समृद्धि, सौभाग्य और मंगलमय वातावरण स्थापित होता है।
अपने उद्बोधन में गुरू माता मां देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी जी ने बैतूल जिले में जीवनदायिनी मां ताप्ती नदी के पावन तट पर निर्माणाधीन मां कामाख्या धाम का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां मां कामाख्या देवी की दिव्य प्रतिमा स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों से इस पवित्र धर्मकार्य में तन, मन और धन से सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मां कामाख्या धाम क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा।
गुरू माता ने श्रद्धालुओं को यह भी बताया कि 22 जून से 25 जून तक मां कामाख्या देवी का पावन अंबुवाची महापर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह शक्ति साधना का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें मां की विशेष पूजा, साधना, जप, तप और अनुष्ठान का विशेष महत्व होता है तथा देशभर से श्रद्धालु शक्ति आराधना में सहभागी होते हैं।
कथा के दौरान भक्त चरित्रों, देवी भक्ति की महिमा और सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन किया गया। श्रद्धालु कथा श्रवण के दौरान भावविभोर होकर माँ भगवती, मां बगलामुखी और मां कामाख्या के जयकारे लगाते रहे। कथा समापन के पश्चात पूर्णाहुति, महाआरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। तीन दिवसीय इस धार्मिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत वातावरण निर्मित कर श्रद्धालुओं के हृदयों में मां भगवती के प्रति अटूट आस्था का संचार किया।




