राष्ट्रपति सम्मान के साथ लौटे बलदेव वाघमारे, पुष्पक कलाकृति ने दिलाया राष्ट्रीय सम्मान
सूर्यवंशी ढोलेवार कुन्बी समाज ने रेलवे स्टेशन पर किया स्वागत

बैतूल। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कर लौटे टिगरिया ग्राम के प्रसिद्ध कलाकार बलदेव वाघमारे का बैतूल रेलवे स्टेशन पर सूर्यवंशी ढोलेवार कुन्बी समाज द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उनके आगमन पर समाज के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समारोह में सूर्यवंशी ढोलेवार कुन्बी समाज के जिला अध्यक्ष राकेश घंगारे, उपाध्यक्ष महेश पारधे, ब्लॉक अध्यक्ष कृष्णा रावते, सचिव शिवप्रसाद गंगारे, सह सचिव कपिल गंगारे, नरेंद्र कापसे, रविशंकर रावत और ज्ञानीराम घंगारे शामिल हुए। सभी ने एकजुट होकर बलदेव वाघमारे को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
जिला अध्यक्ष राकेश घंगारे ने बताया कि बलदेव वाघमारे को पुष्पक कलाकृति के लिए राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया है। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बैतूल जिले की भरेवा धातु कला से निर्मित पुष्पक कलाकृति भेंट की थी। इससे बैतूल की जनजातीय कला को राष्ट्रीय मंच पर अद्वितीय पहचान मिली।
– यह है भरेवा कला
यह कलाकृति ढोकरा या भरेवा कला पर आधारित है, जो मधुमक्खी के मोम की ढलाई तकनीक से तैयार होती है। मोम की आकृति पर मिट्टी चढ़ाई जाती है, फिर उसे आग में तपाकर सांचे में पिघली पीतल की धातु भरी जाती है। यह कला धार्मिक और पौराणिक विषयों को मूर्त रूप देती है।
बलदेव वाघमारे अपने परिवार और करीब 200 कारीगरों के साथ इस विलुप्त होती कला को नई पहचान दे रहे हैं। गांव के लगभग 50 परिवार सीधे इस कार्य से जुड़े हैं।
-इस आर्ट को मिल चुकी है वैश्विक पहचान
बलदेव वाघमारे को कालिदास अकादमी सम्मान, विश्वकर्मा पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कलाकृतियां अमेरिका, फ्रांस समेत कई देशों में प्रदर्शित हो चुकी हैं।




