High Court gave relief to Panchayat worker Om Pawar: हाई कोर्ट ने पंचायत कर्मी ओम पवार को दी राहत
सीएमओ के आदेश को किया स्थगित, ओम पवार को पुनः कार्य पर रखने के निर्देश दर-दर भटकने के बाद हाई कोर्ट में मिला न्याय

बैतूल। नगर परिषद घोड़ा डोंगरी में पदस्थ पंचायत कर्मी ओम पवार को अंततः उच्च न्यायालय से राहत मिल गई है। दरअसल, सीएमओ ऋषिकांत यादव के आदेश क्र. 698 के तहत ओम पवार को कार्य से पृथक किया गया था,दो माह से विभिन्न अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने के बाद ओम पवार ने 1 जुलाई 2024 को उच्च न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने 9 जुलाई 2024 को सुनवाई करते हुए उक्त आदेश को स्थगित कर दिया और को पुनः उनके पूर्व पद पर कार्य करने के निर्देश दिए।
ओम पवार ने पहले कलेक्टर को परिवार सहित उपस्थित होकर दो बार आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने जनसुनवाई, जिला शहरी विकास परियोजना, संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास भोपाल और अध्यक्ष नगर परिषद घोड़ाडोंगरी को आवेदन किया। लेकिन, किसी भी स्तर पर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
माननीय उच्च न्यायालय में 2024 का डब्लूपी नंबर 17696 (ओमप्रकाश पवार बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य) के तहत याचिका प्रस्तुत की गई।
याचिकाकर्ता के वकील राकेश कुमार जैन ने तर्क दिया कि ओम पवार के खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं और उन्हें उचित अवसर नहीं दिया गया। प्रतिवादी-राज्य के लिए सरकारी वकील पुनीत श्रोती ने भी अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं।
— अक्षम प्राधिकारी द्वारा पारित किया आदेश —
याचिकाकर्ता के वकील श्री जैन ने बताया कि याचिकाकर्ता की सेवाएं इस आधार पर समाप्त की गईं थीं कि उन्होंने चुनाव कर्तव्यों के दौरान चूक की और जारी किए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को उचित अवसर नहीं दिया गया और तथ्यों का पता लगाए बिना एक अक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश पारित किया गया। अंतरिम उपाय के तहत, न्यायालय ने निर्देश दिया कि सुनवाई की अगली तारीख तक आक्षेपित आदेश का क्रियान्वयन स्थगित रहेगा और याचिकाकर्ता को पंचायत कर्मी के पद पर अपने कर्तव्यों का पालन करने की अनुमति दी जाएगी। न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को स्वीकार किया और आदेश जारी किया। इस निर्णय से पंचायत कर्मी ओम पवार को न्याय मिला है। न्यायालय ने सुनवाई के बाद कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच बिना उचित प्रक्रिया के की गई और उन्हें सही तरीके से अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला। न्यायालय ने आदेश दिया कि ओम पवार को पुनः उनके पद पर रखा जाए और आक्षेपित आदेश का क्रियान्वयन स्थगित रहेगा।
— सीएमओ के निर्णय पर सवाल–
इससे पहले भी पी.ई.सी ने सीएमओ ऋषिकांत यादव के आदेश को स्थगित कर ओम पवार को पुनः नौकरी पर रखने का आदेश पारित किया था, लेकिन सीएमओ ने इस आदेश का पालन नहीं किया था। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीएमओ ऋषिकांत यादव हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हैं या फिर कोई नया नियम लाकर स्थिति को और जटिल बनाते हैं।




