डोवर से फ्रांस तक 36 किलोमीटर समुद्र में तैराकी करेंगे रामबरन

लहरों से टकराएंगे देश के लिए लहराएंगे तिरंगा,विक्रम अवार्डी रामबरन पाल को शासन से मदद की आस

बैतूल। स्विमिंग कोच एवं विक्रम अवार्डी रामबरन पाल को स्विमिंग एंड पायलटिंग फेडरेशन लंदन की ओर से इंग्लिश चैनल तैराकी के लिए आमंत्रण मिला है। वे सितंबर 2025 में डोवर से फ्रांस तक 36 किलोमीटर समुद्र में तैराकी करेंगे। इसके लिए उन्हें कुल 16 लाख 13 हजार रुपए की आवश्यकता है। यह राशि वे स्वयं नहीं जुटा पा रहे हैं, इसलिए शासन और प्रशासन से आर्थिक सहयोग की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

रामबरन पाल वर्तमान में नगर पालिका के स्विमिंग पूल में स्विमिंग कोच के रूप में कार्यरत हैं। उनके मार्गदर्शन में अब तक हजारों युवा तैराकी के क्षेत्र में सफलता हासिल कर चुके हैं। वे खुद उत्कृष्ट तैराक हैं और अपने अनुभव और समर्पण से नई पीढ़ी को भी तैराकी की बारीकियां सिखा रहे हैं। कई युवा उनके प्रशिक्षण से प्रेरित होकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं, जिससे रामबरन का नाम तैराकी के क्षेत्र में भी आदर और सम्मान से लिया जाता है।

– इंग्लिश चैनल पार करना दुनिया की सबसे कठिन तैराकी 

रामबरन पाल अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 22 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2 पदक जीत चुके हैं। उन्हें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा राज्य के सर्वोच्च खेल सम्मान विक्रम अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। इंग्लिश चैनल पार करना दुनिया की सबसे कठिन तैराकी चुनौतियों में गिना जाता है। इसे स्विमिंग की एवेरेस्ट चढ़ाई माना जाता है। रामबरन के अनुसार यह तैराकी लगातार 14 घंटे चलेगी और इसके लिए वे प्रतिदिन 7 घंटे अभ्यास कर रहे हैं।

इस चुनौतीपूर्ण स्विमिंग के लिए उन्हें ब्रिटेन के डोवर शहर में 1 सितंबर से 30 सितंबर तक रहना होगा। इस दौरान वे ठंडे पानी में अभ्यास करेंगे और मौसम के अनुसार जब अवसर मिलेगा, तब वे डोवर से फ्रांस तक समुद्र में उतरेंगे। इस तैराकी को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए उन्होंने चैनल स्विमिंग एंड पायलटिंग फेडरेशन में पंजीकृत पायलट माइकल ओरम को बुक किया है।

– तैराकी से दिलाना चाहते हैं भारत को गौरव

इस अभियान में रामबरन पाल के साथ उनके कोच सतेन्द्र सिंह भी मौजूद रहेंगे। इस संबंध में ब्रिटिश उच्चायोग नई दिल्ली को फेडरेशन द्वारा पत्र भी भेजा गया है, जिसमें पुष्टि की गई है कि रामबरन पाल को इंग्लिश चैनल स्विमिंग के लिए सितंबर 2025 में बुक किया गया है।चैनल स्विमिंग एंड पायलटिंग फेडरेशन की वेबसाइट पर इस चुनौती की जानकारी भी उपलब्ध है। रामबरन ने बताया कि वे इस तैराकी से भारत को गौरव दिलाना चाहते हैं और यह दिखाना चाहते हैं कि दिव्यांगता कभी भी सपनों की उड़ान में बाधा नहीं बन सकती। अब यह देखा जाना बाकी है कि शासन-प्रशासन रामबरन के इस मिशन को समर्थन देता है या नहीं। एक ओर जहां पूरा देश ओलंपिक और एशियन गेम्स में खिलाड़ियों को समर्थन देने की बात करता है, वहीं एक दिव्यांग तैराक अपने देश का नाम ऊंचा करने के लिए मदद का इंतजार कर रहा है।

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