Emergency department works for life saving: लाइफ सेविंग का काम करता है इमरजेंसी विभाग: डॉ.वी. निरंजनी


बैतूल। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की कंसलटंट (एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी) डॉ. वी. निरंजनी ने कहा,वर्तमान समय में लोगों में मेडिकल इमरजेंसी के बारे में अवेयरनेस की जरूरत है क्योंकि आमतौर पर देखा जाता है कि लोग किसी भी समस्या के लिए इमरजेंसी विभाग में पहुंच जाते हैं.  यहां केवल इमरजेंसी पेशेंट को ही लाना चाहिए जिन्हे तुरंत उपचार की आवश्यकता है. इमरजेंसी विभाग में उच्च प्रशिक्षित स्टाफ और डॉक्टर रहते हैं जिनका फायदा उन्हें मिलना चाहिए जो ज़्यादा पीड़ित है और जिन्हे तुरंत उपचार की आवश्यकता है. सबसे पहले तो यह जागरूकता लानी जरूरी है कि कौनसे पेशेंट को इमरजेंसी विभाग में ले जाना चाहिए और किसे ओपीडी में.यदि पेशेंट को सांस लेने में तकलीफ हो रही है, चेस्ट पेन है, स्ट्रोक की समस्या है, लकवे का शिकार हुआ है, ज्यादा बुखार है, चक्कर आकर गिर गया है, एक्सीडेंट हुआ है तो उसे बगैर देरी किए इमरजेंसी विभाग में ले जाना चाहिए. अन्यथा पेशेंट 3-4 दिनों से समस्या से जूझ रहा है और उसे सर्दी, खांसी जैसी सामान्य समस्या है तो इसके लिए ओपीडी में जाना चाहिए. ऐसे में इमरजेंसी विभाग का लोड कम होगा और जो वाकई इमरजेंसी पेशेंट हैं, उन्हें यह सुविधा तत्काल प्रभाव से मिल सकेगी क्योंकि इमरजेंसी विभाग लाइफ सेविंग का काम करता है.मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की कंसलटंट (एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी) डॉ. वी. निरंजनी ने आगे कहा,सबसे जरूरी तो यह है कि हर किसी के घर में फर्स्ट एड किट होना ही चाहिए. इसमें कॉटन, क्रेप बैंडेज, बिटाडीन क्रीम,स्प्रे,गौज रोल आदि चीजें होनी चाहिए. हर किसी को फर्स्ट एड के लिए जरूरी बुनियादी चीजें सीखनी चाहिए.इमरजेंसी की स्थिति में इन चार बातों का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए. वो बाते है:इमरजेंसी कंडिशन में घबराना बिल्कुल नहीं चाहिए,करीबी अस्पताल का कॉन्टैक्ट नंबर हमेशा अपने मोबाइल में सेव कर के रखें,एंबूलेंस को कॉल करते समय पेशेंट की पूरी स्थिति बताएं,एंबूलेंस आने तक पेशेंट की योग्य देखभाल करें.एंबूलेंस बुलाते समय पेशेंट की स्थिति बताए.एंबूलेंस बुलाते समय ही पेशेंट की पूरी जानकारी देनी चाहिए ताकि उसके अनुसार सुविधाओं वाली एंबूलेंस उपलब्ध हाे सके. जैसे पेशेंट को सांस लेने में दिक्कत है तो उसे वेंटीलेटर की जरूरत होती है. ऐसे में वेंटीलेटर की सुविधा वाली एंबूलेंस उपलब्ध कराई जा सकती है. तब तक पेशेंट की योग्य देखभाल करें.कभी भी अधूरी जानकारी के साथ पेशेंट को कोई भी उपचार ना दे क्यों की अधूरी जानकारी हानिकारक एवं जानलेवा हो सकती है. जैसे मिर्गी आने पर लोग पेशेंट के हाथ में लोहा देते हैं, उसे केरोसीन पिलाते हैं.ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि यह पेशेंट के लिए नुकसानदेह हो सकता है. मिर्गी आने पर केवल मरीज को करवट लेटाना चाहिए. एक से डेढ़ मिनट बाद इसका स्ट्रोक अपने आप चला जाता है, फिर पेशेंट को अस्पताल ले जा सकते हैं. इमरजेंसी पेशेंट के लिए अस्पताल का चयन भी बहुत मायने रखता है. यदि पेशेंट को लकवा मारा है या हार्ट अटैक आया है तो उसे मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में ही ले जाएं. ऐसे हॉस्पिटल में जाये जहा एक ही छत के नीचे सभी प्रकार की अत्याधुनिक मल्टी स्पेशलिटी सुविधाएं और प्रशिक्षित डॉक्टर और स्टाफ 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं और जहाँ अत्याधुनिक डायग्नोसिस से लेकर सभी उपचार एवं सर्जरी तक की सुविधाएं उपलब्ध हों.

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