बैतूल के 92 वनग्रामों के पट्टा विहीन किसानों को भी मिलेगा डीएपी-यूरिया
जयस युवा प्रकोष्ठ ने कलेक्टर से वन अधिकार कानून के प्रावधानों के आधार पर खाद उपलब्ध कराने की मांग की

बैतूल। जयस युवा प्रकोष्ठ ने जिले के 92 वनग्रामों के पट्टा विहीन किसानों को भी नियमानुसार डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग की है। जयस युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष सोनू धुर्वे ने कहा कि प्रशासनिक कारणों से वनग्रामों में पट्टे वितरित नहीं हो पाए हैं, जिसके चलते किसानों को खाद लेने में परेशानी हो रही है।
उन्होंने बताया कि जनवरी 2008 से लागू वन अधिकार कानून 2006 की धारा 2(च) में वनग्रामों की परिभाषा और धारा 3(1)(ज) में वनग्रामों, पुराने आवासों, असर्वेक्षित ग्रामों और अन्य ग्रामों के बसने एवं संपरिवर्तन के अधिकार का प्रावधान है। इसी आधार पर पट्टा विहीन किसानों को भी नियमानुसार उर्वरक का पात्र बनाए जाने की मांग कलेक्टर से की गई है।
भीमपुर के आमढाना वनग्राम के किसानों ने बताया कि पट्टा नहीं होने के कारण उन्हें यूरिया नहीं मिल पा रहा था, जिससे फसल को नुकसान हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार 18 किसानों के पट्टों की वर्ष 2006-07 में समयावधि समाप्त हो गई थी, जिनका नवीनीकरण किया जाना चाहिए।
जयस कार्यकर्ता लंकेश करोचे ने कहा कि जिले के 92 वनग्रामों में आदिवासी और गैर-आदिवासी किसानों को अब तक वन अधिकार पट्टे नहीं मिल पाए हैं। कुछ किसानों के आवेदन वनमित्र पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज होने के बावजूद करीब 50 वर्षों से उनके साथ अन्याय हो रहा है।
जामवन्त सिंह कुमरे ने कहा कि जिले में ग्राम स्तर पर व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक वन अधिकार और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के प्रावधानों को जल्द लागू किया जाए, ताकि वनग्रामों के आदिवासी किसानों को उनका अधिकार मिल सके।




