प्रकृति का संदेश मिट्टी के हो श्री गणेश
सह शैक्षणिक गतिविधियों में सृजनात्मकता के विकास के लिए बनाए मिट्टी के गणेश

बैतूल। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बच्चो में सृजनात्मकता के विकास हेतु शासकीय आदिवासी माध्यमिक शाला सिमोरी में सह शैक्षणिक गतिविधियों के अंतर्गत साहित्यिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, खेलकूद योग, स्काउट, रेडक्रास के साथ सृजनात्मकता के विकास हेतु स्कूली बच्चों ने मिट्टी के गणेश बनाए बच्चों को प्रकृति से जोड़ने और सीमित संसाधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन हेतु प्रेरित किया गया। मिट्टी से बनी ये प्रतिमाएं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगी। इस अवसर पर शिक्षक शैलेंद्र बिहारिया ने बताया की पर्यावरण को बचाने प्रकृति का है संदेश मिट्टी के हो श्री गणेश का संदेश दिया जा रहा है ताकि लोग पीओपी की मूर्तियां न खरीदे उन्होंने कहा कि श्री गणेश की मिट्टी की प्रतिमाएं नदी और पर्यावरण के लिए फायदेमंद ही होती है इसकी मिट्टी को गमलों में भी आस्था के साथ प्रयोग किया जा सकता है। इस अवसर पर मिट्टी के गणेश अर्जुन बडौदे, देवा सेलुकर, आदर्श धुर्वे, रोशन धुर्वे, मयूर काकोड़िया, विक्की काकोडिया, पियूष वरकड़े, दियांशु उईके, निखिल नवडे, सोनाली उईके, प्रिंस पदम, वैशाली उईके, भावना परते, कल्पना कुमरे, पलक उईके, करिश्मा धुर्वे ने खेतों की मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं बनाई और अपनी सृजनात्मकता को दिखाया।





