गांव-गांव में पानी की गुणवत्ता सुधारने जुटी जल समिति, प्रशिक्षण में सिखी मियावाकी जंगल उगाने की विधि

बैतूल। जल ही जीवन है, और हर घर तक शुद्ध जल पहुँचाने के संकल्प को लेकर भारत सरकार का जल जीवन मिशन अब गांव-गांव में नई चेतना जगा रहा है। इसी कड़ी में बैतूल जिले के चिचोली और भीमपुर विकासखंडों में जल एवं स्वच्छता समिति के पदाधिकारियों को ग्राम स्तरीय एक दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण देकर उन्हें मिशन की बारीकियों, संचालन पद्धति और जल संरक्षण की तकनीकी जानकारी से सशक्त किया गया।
यह प्रशिक्षण 5 जुलाई को खेड़ली बाजार के सुंदरम लॉन तथा 7 एवं 9 जुलाई को भीमपुर के सुनहरा लॉन चिचोली में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री मनोज कुमार बघेल के निर्देशन में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण में 30 ग्रामों देहलवाड़ा, भयावाड़ी, केकड़िया, भालदेही, कारोपानी, जामुनबिछुआ, सिमरिया, बिसीघाट, बोदुलरैयत, खाड़ेपिपरिया, आदर्शधनोरा, हिड़ली, आदर्शपिपरिया, भीमपुर, चिखली, कुण्डबकाजन, गुल्लरढाना, कुटंगा, लकड़जाम, रतनपुर, बेला, नांदरा, भुरभुर, टाड़ा, चुरनी, अजई, आलमगढ़, आमापुरा, मलाजपुर, पाठाखेड़ा आदि से प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
– जल जीवन मिशन की संरचना 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप की गई
प्रशिक्षण के दौरान जिला समन्वयक एस एल मर्सकोले और भूपेन्द्र मेनवे ने बताया कि जल जीवन मिशन की संरचना 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप की गई है, जिसमें ग्रामवासियों की भागीदारी अनिवार्य है। प्रत्येक ग्राम को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ग्राम कार्य योजना तैयार करनी होती है, जिससे प्रत्येक घर को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा सके। पूर्व में इन ग्रामों की समितियों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया था, और अब तीन माह उपरांत यह पुनश्चर्या प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
– जापान के प्रसिद्ध बॉटनिस्ट डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित मियावाकी तकनीक की दी जानकारी
प्रशिक्षण में कुल 150 प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें सरपंच, पंच, सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, पंप ऑपरेटर, प्लम्बर और स्व-सहायता समूहों के सदस्य शामिल थे। प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर महेश गुंजेले ने जापान के प्रसिद्ध बॉटनिस्ट डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित ‘मियावाकी तकनीक’ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से बहुत कम स्थान में भी झाड़ीदार, मध्यम और बड़े छायादार पौधे लगाकर घना जंगल उगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जलवायु संकट से बचने के लिए इस तकनीक से विश्वभर में 3000 से अधिक जंगल उगाए जा चुके हैं।
– एक पेड़ मां के नाम संकल्प लेकर लिया पौधा रोपण का वचन
प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रतिभागियों ने एक पेड़ माँ के नाम संकल्प लेकर पौधा रोपण का वचन लिया। दूसरे सत्र में बीते तीन माह में किए गए कार्यों की समीक्षा, चुनौतियों, जल कर वसूली, समिति संचालन और जल गुणवत्ता पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों को बताया गया कि नियमित अंतराल में पानी की पीएच, क्लोरीन, हार्डनेस, क्लोराइट, अल्कलाइनिटी, आयरन, नाइट्रेट, टर्बिडिटी, फ्लोराइड, अमोनिया आदि तत्वों की जांच आवश्यक है ताकि जल जनित बीमारियों से बचा जा सके। इसके अतिरिक्त वाटर हार्वेस्टिंग, सोक पिट निर्माण, रिचार्ज सिस्टम, वृक्षारोपण जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में महेश गुंजेले, निलेश रघुवंशी, कुलभूषण, मोगिया उइके आदि ने सक्रिय सहयोग दिया।





