मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के मायने

सीए सुनील हिरानी

भारतीय जनता पार्टी ने यादव समाज से पिछड़ा वर्ग के मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर एक प्रकार से जाति जनगणना एवं पिछड़ा वर्ग की विपक्ष की रणनीति को बहुत बड़ा झटका दिया है। उत्तर प्रदेश एवं बिहार जहां यादव समाज के दो बड़े नेता अखिलेश यादव एवं तेजस्वी यादव स्वयं को इस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हुए पेश करते हैं उनके लिए यह निर्णय उनकी रातों की नींद एवं दिन का चैन छीन लेने जैसा है। यह बात विचार करने योग्य है कि जब 2024 के लोकसभा चुनाव में स्टार प्रचारक के रूप में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जनसभाएं लेंगे तो उसका क्या असर वहां की यादव समाज एवं पिछड़ा वर्ग पर पड़ेगा। भारतीय जनता पार्टी का वर्तमान शीर्ष नेतृत्व अपने चौंकाने वाले निर्णय के लिए जाना जाता है यह निर्णय न केवल अद्वितीय होते हैं अपितु भारतीय जनता पार्टी के आम कार्यकर्ता के विश्वास को बढ़ाने के लिए एक दवा का काम करते हैं क्योंकि इस प्रकार के निर्णयों के पीछे कार्यकर्ता की निष्ठा ईमानदारी मेहनत एवं समर्पण होता है। साथ ही ऐसे निर्णयों से विपक्ष कभी भी भारतीय जनता पार्टी पर वंशवाद के आरोप नहीं लगा सकता। मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से एक बात बिल्कुल स्पष्ट हो चुकी है कि राजस्थान में वसुंधरा राजे सिंधिया का मुख्यमंत्री बनना लगभग असंभव है क्योंकि पार्टी ने जो निर्णय लिए है छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय को मुख्यमंत्री बनाकर जो कि आदिवासी समाज से हैं एवं मध्य प्रदेश से पिछड़ा वर्ग के यादव समाज के मोहन यादव को मुख्यमंत्री बना कर एक प्रकार से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि राजस्थान से भी ऐसा ही कुछ निर्णय होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा उठाया गया यह कदम उत्तर भारत में पिछड़ा वर्ग खासकर यादव समाज का जो वर्ग है उसमें सेंध लगाने का एक बहुत बड़ा कदम है। एक समय था जब जनजाति समाज पर कांग्रेस का आधिपत्य था, लेकिन दिन पर दिन उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव एवं बिहार में लालू प्रसाद यादव के परिवार का प्रभाव इस समाज पर जैसे-जैसे कम हो रहा है वैसे-वैसे यह निर्णय लेकर भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रकार से गर्म लोहे पर चोट की है। अब बात करते हैं जातीय जनगणना की जिस प्रकार विपक्ष जातीय जनगणना की बात को बढ़ावा देकर एक प्रकार से मंडल आयोग की पुनरावृत्ति कर रहा था उसके पहले ही यह कदम उठाकर शीर्ष नेतृत्व ने विपक्ष की कमर तोड़ दी है। यदि कोई यह सोचे कि यह काम एकदम से किया गया है तो यह सही नहीं होगा क्योंकि पिछड़ा वर्ग के पुनरुत्थान के लिए सरकार ने कई प्रकार की लाभार्थी योजनाएं भी लाई, सरकार में विभिन्न स्तरों पर इस वर्ग के लोगों को जगह भी दी। यह कदम उठाकर भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रकार से सबको चौंका तो दिया लेकिन उत्तर प्रदेश एवं बिहार के उन यादव नेताओं को जो पहाड़ से धीरे-धीरे ढलान पर उतर रहे थे एक प्रकार से जोड़ का धक्का देकर उनकी राजनीति के गर्त में उन्हें धकेल दिया है।

(लेखक राष्ट्रीय इस्पात निगम के स्वतंत्र निदेशक एवं प्रक्टिसिंग सीए हैं )

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