जीवन में देना सीखें, तभी पाने का मार्ग खुलेगा: सुधांशु महाराज।

युवा पीढ़ी को संस्कार केन्द्रों की जरूरत, स्पेस नहीं दिशा भी जरूरी। मानसरोवर स्कूल पहुंचे, छात्रों को दिए जीवन निर्माण के सूत्र । शिक्षा के साथ संस्कार और शिक्षक की भूमिका को बताया सर्वोपरि।

बैतूल। विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार प्रातः सत्र में परम पूज्य सुधांशु जी महाराज ने युवा पीढ़ी को संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज का युवा स्पेस की बात करता है, लेकिन उसे सही दिशा और संस्कार केन्द्रों की आवश्यकता है, जहां उसका समग्र विकास हो सके। उन्होंने शरीर की मजबूती पर बल देते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर ही सफल जीवन की आधारशिला है।

– सेवा और त्याग से ही मिलता है जीवन का संतुलन

महाराजश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि किसान अपनी फसल को जमीन से कुछ ऊपर काटता है ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहे। इसी तरह मनुष्य को भी अपनी कमाई का एक हिस्सा समाज और धर्म के कार्यों में लगाना चाहिए, जिससे जरूरतमंदों की सहायता हो सके। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में कुछ पाना है तो पहले देना सीखना होगा और सच्चा आनंद कठिनाइयों का सामना करने से ही मिलता है।

– संकल्प और विचारों पर नियंत्रण जरूरी

प्रवचन में उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में अनेक इच्छाएं और विचार आते हैं, जिन्हें संकल्प और निश्चय के माध्यम से नियंत्रित करना आवश्यक है। निर्भय जीवन जीने के लिए परमात्मा ने जीवन दिया है, इसलिए भय और भ्रम से बाहर निकलना होगा। उन्होंने कहा कि सिंहासन पर बैठने से कोई महान नहीं होता, बल्कि कर्म, सेवा और आचरण ही व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाते हैं।

– मन, बुद्धि और आत्मा का संतुलन ही सफलता की कुंजी

महाराजश्री ने कहा कि वर्तमान समय में बाहरी चमक अधिक दिखाई देती है, लेकिन वास्तविक मूल्य भीतर की सुंदरता में है। उन्होंने बुद्धि को धर्म से और मन को शांति से जोड़ने का संदेश देते हुए कहा कि जब मन के आकाश को खाली किया जाता है, तभी उसमें आनंद और ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए बताया कि जब बुद्धि धर्म से नहीं जुड़ती तो विनाश निश्चित होता है।

– मानसरोवर स्कूल में छात्रों को मिला मार्गदर्शन

प्रातः सत्र के बाद महाराजश्री मानसरोवर द स्कूल पहुंचे, जहां उन्होंने विद्यार्थियों को आशीर्वाद दिया। यह विद्यालय उनके ही करकमलों से 29 नवंबर 2021 को प्रारंभ हुआ था और उनकी प्रेरणा से संचालित हो रहा है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्कार और शिष्टाचार का माध्यम है। शिक्षक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को विश्वास के साथ विद्यालय भेजते हैं और शिक्षा का कार्य एक पवित्र जिम्मेदारी है।

– सपनों को साकार करने का दिया संदेश

महाराजश्री ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि हर बड़ा सपना शुरुआत में छोटा होता है, लेकिन निरंतर प्रयास से वह विशाल रूप लेता है। उन्होंने कहा कि एक दिन में कुछ नहीं होता, लेकिन एक दिन ऐसा जरूर आता है जब सब कुछ बदल जाता है, इसलिए निरंतर साधना और प्रयास ही सफलता का मार्ग है।

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