भीलावाड़ी में शासकीय भूमि विवाद में खड़ी फसल पर चलाई जेसीबी…
1980 से काबिज सात परिवारों ने एफआईआर की मांग की|

बैतूल। ग्राम भीलावाड़ी में शासकीय भूमि को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। खसरा नंबर 83/4 और 83/5 को लेकर चल रहे नामांतरण विवाद के बीच खड़ी फसल पर जेसीबी चलाने का मामला सामने आया है। वर्ष 1980 से भूमि पर काबिज होने का दावा कर रहे सात भूमि हीन परिवारों ने कलेक्टर से शिकायत कर एफआईआर दर्ज कराने और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव, धारा 250 मध्यप्रदेश राजस्व संहिता के प्रकरण और 29 अप्रैल 2025 से लंबित जनसुनवाई आवेदन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता रामकिशोर पिता चिरोंजी मेहरा उम्र 60 वर्ष, अखलेश पिता प्रेमलाल मेहरा उम्र 30 वर्ष, भाऊराव पिता मना खातरकर उम्र 45 वर्ष, अंगद पिता मना खातरकर उम्र 50 वर्ष, बबलू पिता झामलाल टेकाम उम्र 40 वर्ष, मनोज पिता जुग्गी मेहरा उम्र 40 वर्ष तथा लक्ष्मी पति छोटु मेहरा उम्र 60 वर्ष, सभी निवासी भीलावाड़ी तहसील जिला बैतूल ने संयुक्त आवेदन में बताया कि मौजा भीलावाड़ी के खसरा नंबर 83/4 रकबा 3.100 हेक्टेयर भूमि पूर्व में घास मद में दर्ज थी और वर्ष 1980 से 2000 तक के खसरा अभिलेखों में उनका कब्जा दर्ज रहा है। आवेदकों के अनुसार कलेक्टर बैतूल के राजस्व प्रकरण क्रमांक 931/59 वर्ष 1999-2000 के आदेश दिनांक 19 जून 2000 से भूमि मंद घास से परिवर्तित होकर काबिज काश्त घोषित की गई थी।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अनावेदकों ने बिना विधिसम्मत आदेश के खसरा नंबर 83/5 रकबा 3.024 हेक्टेयर में अपना नाम दर्ज करा लिया, जिसकी सूचना आवेदकों को नहीं दी गई। शिकायत में कहा गया है कि नाम दर्ज होने संबंधी कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
आवेदकों के अनुसार अनावेदकों ने खसरा नंबर 83/4 का सीमांकन कराया और उनके विरुद्ध धारा 250 का प्रकरण प्रस्तुत किया। दस्तावेज प्रस्तुत कराने के लिए आवेदन देने पर तहसीलदार द्वारा दस्तावेज उपलब्ध न कराने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है।
शिकायत में यह भी आरोप है कि 23 फरवरी 2026 को खसरा नंबर 83/5 के बजाय 83/4 की भूमि पर जेसीबी चलाकर खड़ी फसल उजाड़ने का प्रयास किया गया। आवेदक रामकिशोर ने बताया कि इस संबंध में 29 अप्रैल 2025 को जनसुनवाई में आवेदन दिया गया था, जिस पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
सातों आवेदकों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर नामांतरण प्रक्रिया की वैधता की पड़ताल, संबंधित दस्तावेजों की जांच तथा आवश्यकतानुसार एफआईआर दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




