कठिन तप का जीवंत उदाहरण हैं जैन संत, आठनेर में घने कोहरे के बीच निकली पावन यत्रा

आठनेर। घने कोहरे और ठंड के बावजूद जैन संतों की तपस्या, संयम और आत्मबल गुरुवार को आठनेर में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। सुबह 8 बजे जैन संतों की पावन यत्रा निकली, जो कठिन तप का जीवंत उदाहरण बन गई।
जैन धर्म में तप, त्याग और अहिंसा को सर्वोच्च माना गया है। संतों का पैदल विहार और कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर प्रवास करना इसी सिद्धांत का प्रतीक है। आठनेर में निकली यह यात्रा जैन संतों के कठोर तप और आत्मसंयम का सशक्त संदेश देती नजर आई।
– कोहरे में भी अडिग श्रद्धा
सुबह घना कोहरा छाया हुआ था, दृश्यता कम थी, लेकिन संतों की पदयात्रा पूरी निष्ठा और शांति के साथ आगे बढ़ती रही। संतों के साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को तप और साधना का जीवंत स्वरूप बताया।
सरस्वती स्कूल से जैन मंदिर तक निकली यात्रा
जैन संतों की यह यत्रा सरस्वती स्कूल आठनेर से प्रारंभ होकर बाजार चौक होते हुए जैन मंदिर पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर धर्मलाभ लिया और मंगल कामनाएं कीं।
– धार्मिक वातावरण से सराबोर नगर
यत्रा के दौरान नगर का वातावरण पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक हो गया। जैन समाज सहित अन्य वर्गों के लोगों ने भी संतों के दर्शन कर उनके तप और संयम को नमन किया।
– कठिन तप का जीवंत उदाहरण
बिना साधनों, बिना सुविधाओं के, मौसम की प्रतिकूलता को स्वीकार कर आगे बढ़ते जैन संतों ने यह संदेश दिया कि आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग त्याग, तप और संयम से होकर ही जाता है।





