राजा भोज, भोजशाला, मां वाग्देवी धार के अग्निवंशी पंवारों की पहचान।
भोजशाला के बाद भोपाल का तख्त और ताज भी चाहिए।

बैतूल। धार से निकलकर सतपुड़ा के घने जंगलों में आकर बसे धार के अग्निवंशी पंवार जाति के लोग 11वीं शताब्दी में राजा भोज, भोजशाला और मां वाग्देवी धार के अग्निवंशी पंवार राजपूत होने की पहचान लेकर धार से निकले थे। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा धार जिले में स्थित भोजशाला मामले में सुनाए गए फैसले का बैतूल जिले के पंवारों ने स्वागत किया है। समाज के पढ़े-लिखे तबके ने न्यायालय के निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह फैसला वर्षों पुराने विवाद में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने ऐतिहासिक, पुरातात्विक और तथ्यात्मक साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिया है, जिससे पंवार समाज की आस्था को नई मजबूती मिली है।
बैतूल जिले के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, साहित्यकार, कहानीकार एवं सत्यकथा लेखक डॉ. रामकिशोर दयाराम पंवार रोंढ़ावाला ने कहा कि भोजशाला पंवारों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है। लंबे समय से इस मामले को लेकर समाज न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा था। अब हाईकोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि न्यायपालिका ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय देने का कार्य कर रही है। उन्होंने इसे सत्य, न्याय और सनातन संस्कृति की जीत बताया।
श्री पंवार 1990 के दशक में धार के विधायक रहे डॉ. करणसिंह पंवार के साथ भोजशाला के दर्शन कर चुके हैं। श्री पंवार ने वर्ष 1990 में धार पर एक वेब पोर्टल भी लॉन्च किया था।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के धार भोजशाला मामले में आए महत्वपूर्ण फैसले से मां वाग्देवी के प्रति आस्था रखने वाले देशभर के धारा नगरी से आकर बसे पंवार समाज में खुशी का माहौल देखा जा रहा है।




