NSS: एनएसएस ने मनाया विजय दिवस

बांग्लादेश की आजादी और भारत की जीत को किया याद 60 स्वयंसेवकों ने निभाई भूमिका, शहीदों को दी श्रद्धांजलि


बैतूल। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस जयवंती हॉक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल में राष्ट्रीय सेवा योजना की पुरुष एवं महिला इकाई ने संयुक्त रूप से विजय दिवस मनाया। यह आयोजन प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी चौबे के संरक्षण और जिला संगठक डॉ. सुखदेव डोंगरे के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गोपाल प्रसाद साहू और डॉ. शीतल खरे की उपस्थिति में इस ऐतिहासिक दिन का महत्व विद्यार्थियों को बताया गया।
डॉ. सुखदेव डोंगरे ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का पूरा घटनाक्रम साझा करते हुए बताया कि 16 दिसंबर को पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. नियाजी ने 93 हजार सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया। इसके बाद बांग्लादेश का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि यह युद्ध तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सेना प्रमुख सैम मानेक शॉ के नेतृत्व में लड़ा गया था। पूर्वी पाकिस्तान के नेता मुजाहिर रहमान की पार्टी को भारी बहुमत मिलने के बावजूद प्रधानमंत्री न बनाए जाने के कारण पूर्वी पाकिस्तान में बगावत शुरू हुई। पाकिस्तानी सेना ने नरसंहार किया, जिसके बाद भारतीय सेना और पूर्वी पाकिस्तान की सेना ने मिलकर विजय प्राप्त की।
डॉ. गोपाल प्रसाद साहू और डॉ. शीतल खरे ने अपने विचार साझा करते हुए युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने इस ऐतिहासिक विजय के महत्व को रेखांकित किया और युवाओं को प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन आयुष घिंडोडे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन अंजली नागोरे ने किया। इस आयोजन को सफल बनाने में 60 स्वयंसेवकों ने अपना सक्रिय योगदान दिया। इनमें इस्त्याक अली, निशु पवार, कुणाल केकतपुरे, पलक राजगोंड, आयुष नागोरे, अनुज धुर्वे, अरविंद गजाम, दयाराम चिचाम, राहुल धुर्वे, खुशी पारखे, दीपाली गायकवाड, कामिनी खवसे, गंगा बड़गारिया, राधा बामने, ज्योति धुर्वे, रानी उइके, भारती गावंडे और किरण धुर्वे प्रमुख रूप से शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में भारतवासियों को विजय दिवस की शुभकामनाएं दी गईं और शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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