मोतियाबिंद का एकमात्र स्थायी और प्रभावी इलाज सर्जरी है: डॉ गर्विता साहू ।
शाहपुर में कर्मा जयंती सप्ताह के तहत लगाए गए नेत्र शिविर में 45 मरीजों को मिलेगी नई रोशनी।

बैतूल। युवा साहू समाज सेवा संगठन जिला बैतूल के तत्वावधान में भक्त शिरोमणि मां कर्मा जयंती सप्ताह के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहपुर में मोतियाबिंद जांच परामर्श एवं ऑपरेशन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ डॉ गर्विता साहू, डॉ महिमा सिंह, गोपाल साहू, नेत्र चिकित्सक डॉ शिवानी यादव, अभिषेक शुक्ला, नूतन राठौर ने साहू समाज की अधिष्ठात्री देवी भक्त शिरोमणि मां कर्मा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। शिविर का शुभारंभ करते हुए डॉ गर्विता साहू ने कहा कि मोतियाबिंद का एकमात्र स्थायी और प्रभावी इलाज सर्जरी है, इसमें आंख के धुंधले प्राकृतिक लेंस को निकाल कर एक कृत्रिम लैंस लगाया जाता है जिसमें फैको या लेजर तकनीक से बिना टांके की सर्जरी की जाती है। यह एक सुरक्षित और सफल प्रक्रिया है जिसमें मरीज को नई रोशनी मिलती है। डॉ महिमा सिंह ने कहा कि मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद शुरुआती 2 से 4 हफ्तों तक सावधानी बरतना जरूरी है। आंखों को रगड़ने, पानी या साबुन जाने से बचें, भारी वजन न उठाए आंखों की सुरक्षा के लिए काला चश्मा पहने,आंखों में घुल जाने से बचाएं और ऑपरेशन के बाद कम से कम 1 से 2 सप्ताह तक ऑपरेशन वाली आंख को छूना नहीं चाहिए। नेत्र चिकित्सक डॉक्टर शिवानी यादव ने कहा कि मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद तेजी से रिकवरी के लिए विटामिन ए सी ई और ओमेगा फैटी एसिड से भरपूर पौष्टिक और आसानी से बचाने वाला भोजन ग्रहण करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां, खट्टे फल, सूखे मेवे, दही और दाल का प्रयोग करना चाहिए । ऑपरेशन के बाद दो से चार दिन तक नरम भोजन करना चाहिए और खूब पानी पीना जरूरी है। गोपाल साहू ने कहा कि मां कर्मा जयंती के आयोजन जिले भर में किया जा रहे हैं जिसमें नेत्र शिविर लगाकर लोगों को नई रोशनी देने का कार्य किया जा रहा है। शिविर में 107 मरीज के आंखों की जांच की गई जिसमें से 45 मरीजों की आंखों में मोतियाबिंद पाया गया, ऑपरेशन के बाद सभी 45 मरीजों को नई रोशनी मिलेगी। मरीजों के ऑपरेशन चिरायु मेडिकल कॉलेज अस्पताल बैरागढ़ भोपाल में किए जाएंगे।




