Wheat After Sugarcane Harvest:गन्ना की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई: किसान रखें इन बातों का खास ध्यान

 

Wheat After Sugarcane Harvest: गन्ना की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों को कुछ विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए ताकि उनकी फसल का उत्पादन बेहतर हो और किसी भी समस्या से बचा जा सके। नीचे दी गई जरूरी जानकारी और सुझाव किसानों के लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

1. समय पर बुवाई करें

गन्ना की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई का सही समय नवंबर के दूसरे पखवाड़े से दिसंबर के पहले सप्ताह तक होता है। समय पर बुवाई करने से फसल को पर्याप्त समय मिलता है और उपज अच्छी होती है।

2. खेत की अच्छी तरह से तैयारी करें

गन्ना कटाई के बाद खेत में जड़ें और कचरा रह जाता है, जो गेहूं की बुवाई में बाधा डाल सकता है।खेत की अच्छी तरह से सफाई करें।गन्ने की जड़ों को हटाकर भूमि को गहरी जुताई करें।खेत में 2-3 बार हल चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाएं।

3. मिट्टी परीक्षण कराएं

मिट्टी की उर्वरता और पीएच स्तर की जांच कराएं, आवश्यकता अनुसार उर्वरकों का उपयोग करें।संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश डालें।

4. उन्नत किस्मों का चयन करें

गेहूं की उन्नत और रोग-प्रतिरोधी किस्में चुनें, जैसे कि एचडी-2967, एचडी-3086, पीबीडब्ल्यू-550, और क्षेत्र विशेष की कृषि जलवायु के अनुसार किस्मों का चयन करें।

5. बीज उपचार करें

बीजों को रोग मुक्त बनाने के लिए बुवाई से पहले उनका उपचार करें।फफूंदनाशक जैसे कार्बेन्डाजिम या थीरम का उपयोग करें।100 किलो बीज पर 2-3 ग्राम फफूंदनाशक लगाएं।


6. जल निकासी का ध्यान रखें

गन्ने के खेतों में नमी ज्यादा होती है, इसलिए यह सुनिश्चित करें कि जल निकासी का अच्छा प्रबंधन हो।फसल के लिए उपयुक्त नमी स्तर बनाए रखें।खेत में जलभराव न होने दें।

7. समुचित बुवाई तकनीक अपनाएं

गेहूं की बुवाई के लिए सीड ड्रिल मशीन का उपयोग करें।कतारों के बीच की दूरी 20-22 सेंटीमीटर रखें।बीज की गहराई 4-5 सेंटीमीटर होनी चाहिए।

8. उर्वरक और सिंचाई प्रबंधन

पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिनों बाद करें, बुवाई के समय डीएपी और पोटाश का प्रयोग करें।नाइट्रोजन को तीन हिस्सों में बांटकर उपयोग करें – बुवाई के समय, पहली सिंचाई के बाद और तिलिया अवस्था में।

9. खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान दें

खरपतवार गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।पेंडिमेथालिन जैसे खरपतवारनाशी का छिड़काव करें।समय-समय पर खेत की निगरानी करें।

10. रोग और कीट प्रबंधन

गेहूं की फसल में गेरूआ रोग और जड़ गलन जैसे समस्याएं हो सकती हैं।खेत का नियमित निरीक्षण करें।रोग या कीट के लक्षण दिखने पर तुरंत उचित दवा का उपयोग करें।

निष्कर्ष

गन्ना की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई करते समय इन बातों का ध्यान रखने से किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं बल्कि फसल की गुणवत्ता भी सुधार सकते हैं। समय पर और सही विधि से बुवाई करना ही सफल कृषि की कुंजी है।

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