मंडी शुल्क वृद्धि के खिलाफ जिला कांग्रेस ने कृषि उपज मंडी में किया प्रदर्शन
निर्णय वापस नहीं लेने पर भाजपा सरकार को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

बैतूल। मंडी शुल्क वृद्धि के विरोध में शुक्रवार को जिला कांग्रेस उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता कृषि उपज मंडी पहुंचे। प्रदर्शन में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंडी गेट पर भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए मंडी शुल्क 1.5 प्रतिशत किए जाने के फैसले को किसान और व्यापारी विरोधी बताया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर निर्णय तत्काल वापस लेने की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मंडी शुल्क वृद्धि का फैसला वापस नहीं लिया तो किसानों और व्यापारियों के साथ प्रदेशभर में उग्र जनआंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र (धीरू) शर्मा ने बताया कि मंडी शुल्क बढ़ने से किसानों, व्यापारियों, लघु एवं मध्यम उद्योगों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार ने जल्द फैसला वापस नहीं लिया तो प्रदेशभर में किसानों और व्यापारी संगठनों के साथ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
– व्यापार और रोजगार पर पड़ेगा असर
ज्ञापन में कहा गया कि मंडी शुल्क बढ़ने से कृषि उपज के व्यापार की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर किसानों को मिलने वाले मूल्य और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। कांग्रेस ने दावा किया कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में अधिक मंडी शुल्क लागू होने से व्यापार दूसरे राज्यों की ओर स्थानांतरित हो सकता है, जिससे प्रदेश के व्यापार, निवेश और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
– हितधारकों से चर्चा किए बिना लिया फैसला
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने व्यापारिक संगठनों, किसान प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा किए बिना मंडी शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया है। पार्टी ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि सरकार को व्यापार और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों से संवाद कर सर्वसम्मति के आधार पर नई नीति बनानी चाहिए।
– चार प्रमुख मांगें रखीं
मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में मंडी शुल्क 1.5 प्रतिशत किए जाने का निर्णय तत्काल वापस लेने, व्यापारिक संगठनों, किसान प्रतिनिधियों एवं संबंधित हितधारकों से व्यापक चर्चा कर नई नीति बनाने, किसानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डालने वाली व्यापार एवं कृषि नीति लागू करने तथा भविष्य में किसी भी शुल्क वृद्धि से पहले सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत विचार-विमर्श सुनिश्चित करने की मांग की गई।
– आंदोलन की जिम्मेदारी शासन पर होगी
ज्ञापन में कहा गया कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो मध्यप्रदेश कांग्रेस उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ किसानों और व्यापारी संगठनों के साथ प्रदेशभर में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से जनआंदोलन करेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र (धीरू) शर्मा, प्रदेश सचिव समीर खान, किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष जगदीश गोचरे, जिला कांग्रेस कोषाध्यक्ष लोकेश पगारिया, पूर्व कोषाध्यक्ष प्रशांत मरोठी, सुनील जेधे, करण प्रजापति, अशोक नागले, तरुण पाटिल, पुष्पा पेंद्राम, नंदिनी तिवारी, प्रेरणा शर्मा, सुभाष पांडे, राकेश गुप्ता, सुरेंद्र चंदेल, गोविंद साहू, सुभाष राठौर, मनोज बडोनिया, नवलसिंह ठाकुर, विशाल धुर्वे, अन्नू गुबरेले और राजेश कलंबे सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।




