दशरथ और कौशल्या के निश्छल प्रेम ने निर्गुण निराकार ब्रह्म को सगुण साकार बना दिया: पं निर्मल कुमार शुक्ल।

बैतूल। वैसे तो शास्त्रों में परमात्मा को आज अनादि अगोचर अचिंत्य और मन बुद्धि से परे सर्वव्यापकत अविनाशी कहा है। वह जन्म-मृत्यु से परे है कण कण में व्याप्त है और नाम रूप तथा गुण से भी अलग है किन्तु जब कोई भक्त शुद्ध अंतःकरण से उसकी आराधना करता है तो सारे नियम और विधान तोड़ कर वह सगुण साकार बन जाता है।सर्व व्यापक ब्रह्म एक माता की गोद में सीमित हो जाता है असीम ससीम बन जाता है जगत का पिता पुत्र बन जाता है तथा निरंजन की आंखों में माता अंजन लगाने लगती है।श्री हनुमत कथा महोत्सव न्यू बैतूल स्कूल ग्राउंड में आज राम नवमी महोत्सव पर श्री राम जन्म की व्याख्या करते हुए मानस महारथी पं निर्मल कुमार ने उक्त उद्गार व्यक्त किए।आप ने कहा कि राजा दशरथ मूर्तिमान वेद हैं और तीनों रानियां वेद की तीन ऋचाएं हैं । माता कौशल्या ज्ञान कैकेई कर्म और सुमित्रा उपासना हैं। चारों पुत्र वेद के चार पुरुषार्थ हैं जिनमें भरत जी धर्म शत्रुघ्न अर्थ लक्ष्मण जी काम (कामना) तथा भगवान श्री राम मोक्ष हैं। महराज श्री ने बताया कि राजा दशरथ की आयु 60,000 वर्ष बीत गई लेकिन कोई पुत्र नहीं हुआ तब गुरु वशिष्ठ के आदेश से श्रृंगी ऋषि बुलाए गए उन्होंने पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराया परिणाम स्वरूप राजा दशरथ को चार पुत्र प्राप्त हुये। भगवान श्री राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी के को मध्य दिन में हुआ। चैत्र का मतलब बसंत रितु हर तरफ वृक्षों में नई नई कोपलें आ गई हैं कृषक के घर नई फसल आ गई है पुष्पों से उपवन सुवासित हो रहे हैं।आमों में बौर लगे हैं जिनमें मदमस्त कोयलों का कुहू कुहू स्वर झंकृत हो रहा है। मंगल वार का दिन है क्योंकि भगवान श्रीराम मंगल भवन अमंगल हारी हैं।ए सारे जगत का मंगल करने आए हैं।मध्य दिन है न अधिक गर्मी न अधिक सर्दी श्रीराम का स्वभाव ऐसा ही है न अधिक कठोर न अधिक कोमल।12 बजे दिन संसार भोजन करके विश्राम में रहता है श्रीराम अखिल लोक को विश्राम देने आए हैं। देवता विमानों पर बैठ कर मंगल गान करते हुए पुष्प बरसा रहे हैं सरयू में उत्ताल तरंगें उठ रही हैं पुनर्वसु नक्षत्र चल रहा है अभिजित मुहूर्त में भगवान श्री राम का प्रादुर्भाव हो गया।नौ के अंक को पूर्णांक माना जाता है यह किसी अंक से कटता नहीं है तो भगवान श्री राम भी पूर्ण ब्रह्म हैं।इस प्रकार श्री राम जन्म की मंगल मय कथा सुनाते हुए महराज श्री ने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के यजमान राजेश अवस्थी संगीता अवस्थी प्रमोद अवस्थी प्रिया अवस्थी शोभित अवस्थी एवं समस्त अवस्थी परिवार ने महराज श्री का पुष्प हार से स्वागत किया तथा समस्त श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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