Betul news: कौशल शिविर में बाल अधिकार एवं सुरक्षा पर हुई चर्चा, छात्राओं को बताए उनके अधिकार
विषय विशेषज्ञ ने छात्राओं को विस्तार पूर्वक दी जानकारी

बैतूल। ई.एफ.ए.शासकीय कन्या उ.मा.विद्यालय बैतूल गंज बैतूल में 64 कलाओं पर आधारित कौशल शिविर में सोमवार 15 अप्रैल को बाल अधिकार एवं सुरक्षा पर विद्यालय की छात्राओं को जानकारी दी गई। कौशल शिविर के प्रभारी शिक्षक महेश गुंजेले ने बताया कि भारत में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए जो कानूनी प्रावधान तथा संरक्षण ढांचा है उस पर विषय के विशेषज्ञ जी.आर.माथनकर ने बताया कि बच्चों के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्रों के सम्मेलन के आर्टिकल 1 में तथा किशोर न्याय अधिनियम 2015 सेक्शन 2 के 12 में 18 वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति बच्चा है और बच्चों को जीवन-जीवितता का अधिकार,विकास करने का अधिकार,संरक्षण का अधिकार,भागीदारी का अधिकार दिया गया है। विशेषज्ञ माथनकर ने कहा कि 18 वर्ष से अधिक के युवाओं से बच्चों के अधिकार अलग है उन्होने बताया कि बच्चे नाजुक और कमजोर है, लिंग और जातिगत भेदभाव, बच्चे अपनी आवाज़ नहीं उठा सकते, बच्चों के साथ विभिन्न समाजों में अक्सर दुर्व्यवहार होता हैं, बच्चों को पूर्ण मनुष्य का दर्जा नहीं दिया जाता, बच्चों को विशेष संरक्षण की आवश्यकता होती है, बच्चों को भागीदारी करने का मौका नहीं दिया जाता इस आधार पर उन्हें संरक्षण दिया जाता हैं।
— बच्चों को संरक्षण एवं देखरेख की आवश्यकता–
विशेषज्ञ पुष्प कुमार घोटे ने बताया कि उन बच्चों को संरक्षण एवं देखरेख की आवश्यकता होती है जो बच्चे घर विहीन सड़क पर जीवनयापन करते हैं,भीख मांगते हैं, तस्करी के शिकार बच्चे, अनाथ और परित्यक्त बच्चे, यौन दुर्व्यवहार के शिकार बच्चे, कुपोषित बच्चे, गुम हो गए बच्चे, नशे की लत वाले बच्चों का जीवन जोखिम में है। प्राकृतिक आपदा के शिकार, मानसिक रूप से अस्थिर बच्चे, बाल विवाह के शिकार बच्चे, जिनकी देखभाल माता-पिता नहीं कर सकते, बाल श्रम के शिकार बच्चे, भेदभाव के शिकार बच्चे, एच.आई.वी.तथा कुष्ट रोग से पीड़ित एवं दिव्यांग बच्चे तथा अन्य ऐसे बच्चें सभी बाल अधिकार एवं सुरक्षा के दायरे में आते हैं। इन बच्चों से संबंधित मौलिक अधिकार, बच्चों से संबंधित निर्देशात्मक सिद्धान्त, बच्चों के लिए राष्ट्रीय चार्टर, 2003, बच्चों के लिए राष्ट्रीय नीति-2013, बच्चों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना-2016, भारत में बाल संरक्षण कानून, किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम-2015 आदि ऐसे कानून है जिसमें बच्चों को अधिकार मिले हुए हैं जिस पर छात्राओं को विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई तथा उनके प्रश्नों के जबाब विशेषज्ञों द्वारा दिए गए है।




