भारत रत्न के हकदार है, किन्तु प्रश्न है क्रांतिवीर हेमू कालानी क्यों नहीं?

माननीय पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण जी आडवाणी के हिस्से आया भारत रत्न, क्रांतिकारी शहीद हेमू कालानी के हिस्से आया सिंधी कालोनी का द्वार_आडवाणी जी निश्चित भारत रत्न के हकदार है , किन्तु प्रश्न है क्रांतिवीर हेमू कालानी क्यों नहीं?

भाग _13

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भारत के उप प्रधानमंत्री और संगठन को जमीन से उठाकर अपनी मेहनत से आसमान तक पहुंचाने वाले माननीय लाल कृष्ण जी आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता हैं तो कार्यकर्ताओं को खुशी होती हैं , वे निश्चित ही उस सम्मान के हकदार है , लेकिन क्या वे केवल इसलिए भारत रत्न के हकदार बन सके क्योंकि वे देश के उप प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए ,यदि ऐसा नहीं होता तो शहीद हेमू कालानी भी इस देश में भारत रत्न के हकदार होते? जब ऐसा नहीं होता है तो देश वासियों को दुःख होता हैं।

 नीयती भी भविष्य को पढ़ लेती है, जिस 23 मार्च 1923 को भारत मां के वीर सपूत हेमू कालानी का जन्म हुआ, ठीक उसी दिन 23 मार्च 1931 को भगत सिंह ,राजगुरू, सुखदेव फ़ांसी के फंदे पर झूलते हुए वन्देमातरम का नारा लगाते शहीद हुए। जिस ट्रेन से सरकारी गोला बारूद जाने वाले था, उस ट्रेन को दुर्घटना करवा गोला बारूद लुटने के आरोप में हेमू कालानी पर अंग्रेजों ने मुकदमा चलाया, अदालत ने हेमू कालानी को आजन्म कारावास सुनाया ,लेकिन अंग्रेजो की पुलिस ने याचिका दायर की और हेमू कालानी की आजन्म कारावास की सजा को सजा ए मौत में तब्दील कर दिया और केवल उन्नीस वर्ष की अल्पायु में हेमू कालानी ने भारत मां के वैभव और आजादी के लिए हंसते हंसते फांसी का फंदा चूम लिया। आखिर हेमू कालानी के मातृ भूमि के इस अतुलनीय बलिदान के लिए कौनसा सम्मान हिस्से में आया? अब राज नेता कहेंगे कि हेमू कालानी का बलिदान सर्वोच्च है , वह सम्मानों से ऊपर है तो इस आशय का प्रस्ताव संसद में आज तक क्यों नहीं पारित हो पाया? हेमू कालानी आखिर स्वतंत्र भारत में किस कारण से सजा पा रहे है? सिर्फ इसलिए कि वे 19 वर्ष की आयु में देश के लिए शहीद हो गए? सिर्फ इसलिए कि वे देश के उप प्रधानमंत्री नहीं बन सके? सिर्फ इसलिए कि वे किसी राजनैतिक विचारधारा के पोषक नहीं थे? वे सिर्फ इसलिए आज भारत रत्न पद्म सम्मान से दूर है क्योंकि उनकी विचार धारा केवल भारत मां को परम वैभव पर पहुंचाने की थी, उनकी विचार धारा केवल भारत मां को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने की थी और इसलिए उनके सम्मान के हिस्से आया सिंधी कालोनी का गेट और सियासत में जो सर्वोच्च पद पर पहुंचे उनके हिस्से आया भारत रत्न, मै दावे से कहता हूं कि और यह हकीकत है यदि लाल कृष्ण आडवाणी जी देश के उप प्रधानमंत्री नहीं बनते तो उनके हिस्से में भी भारत रत्न नहीं,किसी कालोनी के गेट से ज्यादा कुछ नहीं आता।

माननीय लाल जी आडवाणी को भारत रत्न दिया जाना हम सभी के गर्व और गौरव की बात है लेकिन 19 वर्षीय क्रांतिकारी वीर सपूत हेमू कालानी को उनके हिस्से का सम्मान नहीं मिल पाने का दुःख हमे रुला देता है।

सरकारों ने एक बार तो सोचना चाहिए कि इस देश में जिन्होंने देश की आजादी के लिए , भारत मां को गुलामियों की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए प्राणोत्सर्ग किये । आखिर उनके हिस्से के सम्मान किधर है? क्या आज भी वे स्वतंत्र भारत में अंग्रेजी हुकूमत के नजरिए से देशद्रोही , आतंकवादी समझे जा रहे है तो लानत है आजाद भारत की सरकारों , राजनेताओं पर और मेरी आजादी और सम्मानों पर।

नोट _किसी को मिले ,बांटे, दिए सम्मानों पर कोई आपत्ति नहीं हम गर्व और गौरव करते हैं, किंतु प्रश्न यह है कि बलिदानियों , क्रांतिकारियों, एवं अन्य योग्य व्यक्ति क्यों इन सम्मानों से वंचित और दूर है?

हेमंत चंद्र दुबे बबलू बैतूल

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