Betul news: फर्जी दस्तावेज के आधार पर हड़प ली 80 वर्षीय बुजुर्ग की खेतीहर जमीन
हल्का पटवारी और राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज से किया फर्जीवाड़ा

बैतूल। जिले के आठनेर तहसील के पुसली गांव में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन हड़पने का मामला सामने आया है। आवेदक गोरे सोलंकी ने इस संबंध में थाना प्रभारी आठनेर को शिकायत दर्ज कराई है।
गौरतलब है आवेदक गोरे सोलंकी 80 वर्षीय बुजुर्ग है, जो पुसली गांव के निवासी और किसान हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि किसन, साहेबलाल, लखन, माखन, और मनोहर ने हल्का पटवारी नामदेव तायवाडे और अन्य राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और उनके हिस्से की जमीन हड़प ली।
गोरे सोलंकी का कहना है कि उनके पास पुसली मौजा में कुल 4.471 हेक्टेयर जमीन है, जिसमें से 1.490 हेक्टेयर उनका हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अनावेदकों ने पटवारी और राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर उनके हिस्से की 3 एकड़ कृषि भूमि पर कब्जा कर लिया है।
— राजस्व नामांतरण पंजी में की काट-छाट–
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि अनावेदकों ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते हुए, संशोधन क्रमांक 12 प्रमाणीकरण आदेश दिनांक 10 अक्टूबर 1991 को लागू किया और फर्जी हस्ताक्षर कर राजस्व नामांतरण पंजी में काट-छाट की। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर, भूमि को अनावेदकों के नाम पर स्थानांतरित कर दिया गया।
— कार्रवाई की मांग–
गोरे सोलंकी ने पुलिस से अनुरोध किया है कि इस मामले की विधिवत जाँच की जाए और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह मामला धारा 420, 467, 468, 120बी, और 34 के तहत गंभीर धोखाधड़ी का है। गोरे सोलंकी ने यह भी आरोप लगाया है कि तत्कालीन भू अधीक्षक ने 15 सितंबर 1993 को प्रविष्टियों का अवलोकन किया था और उन्हें प्रमाणित नहीं किया था। इसके बावजूद भी, हल्का पटवारी नामदेव तायवाडे ने अलग-अलग ऋण पुस्तिकाएँ जारी कर दीं।
— गंभीर धोखाधड़ी का मामला–
इस मामले में आवेदक ने गंभीर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूमि हड़पने का आरोप लगाया है। उन्होंने थाना प्रभारी से इस मामले की गहन जाँच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस थाना आठनेर, एसडीओपी भैंसदेही, अनुविभागीय अधिकारी रा.भैंसदेही, कलेक्टर बैतूल, पुलिस अधीक्षक बैतूल, राजस्व मंत्री म.प्र. शासन भोपाल को भी प्रेषित की गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।




