Betul News: फूट गई नहर, तालाब बन गए खेत, पानी में डूबी गेहूं की फसल

बैतूल जिले में जल संसाधन विभाग की लापरवाही से सापना डेम की नहर फूट गई

Betul News : मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में जल संसाधन विभाग के द्वारा जलाशयों की नहरों की सफाई और गहरीकरण करने में बरती गई लापरवाही से सापना जलाशय की नहर फूट गई। इससे किसानों के खेतों में पानी भर गया है और फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। सापना जलाशय की डी-1 नहर भोगीतेढ़ा के पास शनिवार रात में पानी अधिक आने के कारण फूट गई। इससे कई किसानों के खेतों में पानी भरा गया। सुबह किसान जब खेत पहुंचे तो उन्हें बर्बादी नजर आई। इसकी सूचना किसानों ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को दी जिसके बाद नहर के क्षतिग्रस्त हिस्से को प्लास्टिक और मिट्टी से बंद किया गया।हालांकि शाम तक किसानों के खेतों में पानी भरा रहा जिससे फसल को खासा नुकसान पहुंच गया है।

किसान निरुपम रावत ने बताया कि सापना जलाशय से फसल की सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया है। अधिकांश हिस्से में किसानों के द्वारा सिंचाई का कार्य पूरा कर लिया गया है इसके बाद भी टेल क्षेत्र में पानी पहुंचाने के नाम पर नहर के गेट बंद नहीं किए जा रहे हैं। वर्षा होने के बाद भी नहर में पानी छोड़ा जा रहा है। शनिवार रात में डी 1 नहर में क्षमता से अधिक पानी छोड़ दिया गया। पहले ही सफाई न करने के कारण नहर में भरपूर पानी चलने की स्थिति ही नही है। ऐसे में नहर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और पानी सीधा खेतों में पहुंचने लगा। खेत में जलभराव के कारण गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। इसमें लगभग डेढ़ लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

नहर क्षतिग्रस्त होने से मंटू वर्मा, आशीष पटेल, मनोज राठौर के खेत में भी जलभराव होने के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है। फसलों को नुकसान होने से किसानों में आक्रोश पनपने लगा है। किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग ने नहर में अधिक मात्रा में पानी छोड़ दिया इससे क्षतिग्रस्त हो गई है। सिंगनवाड़ी, बटामा, आरूल सहित अन्य नहरों में भी किसानों की सिंचाई पूरी हो जाने के बाद भी पानी बंद नहीं किया गया है। इससे कई जगह तो नहर का पानी सड़क पर बह रहा है।

किसानों का आरोप है कि जलाशय से पानी छोडऩे के पहले नहरों की साफ-सफाई और मरम्मत कार्य किया जाता है, लेकिन जल संसाधन विभाग ने भरकावाड़ी क्षेत्र की नहर में मरम्मत कार्य पूरा नहीं किया। नतीजा यह है कि नहर में पानी छोडऩे पर क्षतिग्रस्त हो गई। पानी छोडऩे के पहले नहर की मरम्मत की जाती तो किसानों को इस तरह से परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। जल संसाधन विभाग को नहरों की साफ सफाई एवं मरम्मत कार्य के लिए राशि दी जाती है इसके बावजूद भी अच्छे से मरम्मत कार्य नहीं हो पाता है। किसानों ने जल संसाधन विभाग से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की है।

नहीं होती निगरानी :

किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग के द्वारा नहरों में चौकीदारों की तैनाती के नाम पर राशि खर्च तो की जाती है लेकिन मौके पर कोई रहता ही नही है। जब नहर से पानी छोड़ा जाता है तो उसकी देखरेख के लिए कोई कर्मचारी नहीं रहते हैं जिसके कारण भगवान भरोसे ही पानी चलता है। ओव्हर फ्लो होने की स्थिति में इसको नियंत्रण करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होती है। नहरों की समय पर सफाई ना होना और गहरीकरण ना होने से ही किसानों के खेतों में पानी भर रहा है।

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