First irrigation after sowing wheat:गेहूं की बुवाई के बाद पहली सिंचाई: किसान इन बातों का रखें ध्यान

First irrigation after sowing wheat: गेंहू की अच्छी फसल के लिए सही समय पर सिंचाई करना बेहद जरूरी है। विशेष रूप से, बुवाई के बाद पहली सिंचाई का सही समय और तरीका फसल की बढ़वार और पैदावार को प्रभावित करता है। किसानों को सिंचाई प्रबंधन में इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

पहली सिंचाई का सही समय

गेहूं की बुवाई के बाद पहली सिंचाई फसल के 20-25 दिन पूरे होने पर करनी चाहिए। इसे “पहला पानी” या “कबोली पानी” कहा जाता है। इस समय फसल के पौधे तीन से चार पत्तियों की अवस्था में होते हैं।

पहली सिंचाई क्यों है जरूरी?

पहली सिंचाई फसल की जड़ों को मजबूती प्रदान करती है।

पौधे की बढ़वार में तेजी लाती है।मिट्टी में नमी बनाए रखती है, जिससे पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध होते हैं।खरपतवार की वृद्धि को रोकने में मदद करती है।


सिंचाई के लिए उपयुक्त विधि

1. फव्वारा सिंचाई (Sprinkler Irrigation): पानी की कम खपत वाले क्षेत्रों में यह विधि उपयुक्त है।

2. ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation): जल संरक्षण के लिए यह तरीका बेहतर है।

3. नालियों से सिंचाई (Flood Irrigation): पारंपरिक विधि, जहां खेत में नालियां बनाकर पानी दिया जाता है।

सिंचाई करते समय इन बातों का ध्यान रखें

पानी की मात्रा का ध्यान रखें ताकि खेत में जलभराव न हो। मिट्टी का प्रकार देखें। हल्की मिट्टी में अधिक बार और भारी मिट्टी में कम बार सिंचाई की जरूरत होती है।खेत में एक समान पानी पहुंचाएं।फसल के आसपास खरपतवार को नियंत्रित करें।पहली सिंचाई के बाद की देखभाल

1. खरपतवार नियंत्रण: पहली सिंचाई के बाद खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं।कुल्ली या नींदा निकालना करें।खरपतवारनाशी का उपयोग करें, जैसे कि आइसोप्रोट्यूरोन।

 

2. उर्वरक प्रबंधन: पहली सिंचाई के बाद यूरिया (नाइट्रोजन) का छिड़काव करें।1 बीघा खेत में 15-20 किलोग्राम यूरिया डालें।

3. पौधों की निगरानी: पौधों की वृद्धि और रोग के लक्षणों पर ध्यान दें।

अन्य सिंचाई का समय

दूसरी सिंचाई: बुवाई के 40-45 दिन बाद, जब फसल कल्ले (Tillering Stage) पर हो।तीसरी सिंचाई: 60-70 दिन बाद, जब फसल तिलिया (Jointing Stage) पर हो।

निष्कर्ष

गेहूं की बुवाई के बाद पहली सिंचाई फसल की वृद्धि और उपज के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। किसान समय पर सिंचाई करें और मिट्टी की नमी का ध्यान रखें। सही समय पर किया गया यह कार्य फसल की उपज में वृद्धि लाने में मदद करेगा।

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