बैतूल में कर्ज, तमिलनाडु में केस; कानून का डर बनाकर वसूली।
बैतूल के अधिवक्ता भारत सेन ने डिजिटल लोन कंपनियों के कारनामों को किया उजागर।

बैतूल। जिला न्यायालय बैतूल के अधिवक्ता भारत सेन ने डिजिटल लोन कंपनियों द्वारा अपनाई जा रही दबाव की रणनीति को उजागर करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश के बैतूल जैसे क्षेत्रों में मोबाइल के जरिए आसानी से मिलने वाला लोन अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। आर्थिक तंगी के कारण किश्त नहीं चुका पाने पर कंपनियां भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2) और 318(4) लगाकर आपराधिक मुकदमे दर्ज करा रही हैं, जबकि वास्तविकता में लोन डिफॉल्ट सिविल मामला होता है और इसमें शुरुआत से धोखाधड़ी की मंशा साबित होना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि कंपनियां जानबूझकर तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे दूर राज्यों में केस दर्ज कराकर फोरम शॉपिंग कर रही हैं ताकि ऋणियों पर दबाव बनाया जा सके। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 197 के अनुसार मामला उसी क्षेत्र में चलना चाहिए जहां घटना हुई हो। यदि आवेदन बैतूल से किया गया और पैसा यहीं के खाते में आया, तो क्षेत्राधिकार भी बैतूल का ही बनता है।
भारत सेन ने सुप्रीम कोर्ट के सतीशचंद्र रतनलाल शाह बनाम गुजरात राज्य, जी. सागर सूरी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सिविल विवादों को आपराधिक रूप देना गलत है और 7 साल तक की सजा वाले मामलों में सीधे गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि प्रभावित व्यक्ति क्षेत्राधिकार को चुनौती दे सकता है, अग्रिम जमानत ले सकता है, उच्च न्यायालय में याचिका लगाकर एफआईआर रद्द करा सकता है या ट्रायल से पहले डिस्चार्ज आवेदन दे सकता है।
– डरने के बजाय कानूनी अधिकारों के प्रति रहें जागरूक
आरबीआई के नियमों के अनुसार फर्जी कानूनी नोटिस भेजना और डराकर वसूली करना गलत है। पीड़ित व्यक्ति बैंकिंग लोकपाल के पास मुफ्त में शिकायत कर सकता है। अधिवक्ता भारत सेन ने कहा कि बाहरी राज्य की पुलिस बिना स्थानीय अनुमति और ट्रांजिट रिमांड के कार्रवाई नहीं कर सकती। उन्होंने लोगों से अपील की कि लोन न चुका पाना अपराध नहीं बल्कि आर्थिक समस्या है, इसलिए डरने के बजाय कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और जरूरत पड़ने पर मानहानि व प्रताड़ना का मामला भी दर्ज करें।




