Example in service and education: सेवा और शिक्षा में मिसाल बने अशोक साहू, खुद की तनख्वाह से दो शिक्षकों को दे रहे वेतन

हर माह 10 हजार रुपये अपनी जेब से खर्च कर रहे, बच्चों को भी बनाया अपने परिवार का हिस्सा

बैतूल। नरखेड निवासी शिक्षक अशोक साहू को सिर्फ एक शिक्षक कहना उनके व्यक्तित्व को कम आंकना होगा। उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया है कि सेवा का असली अर्थ क्या होता है। वह एक समर्पित शिक्षक के साथ समाजसेवा की वो ऊंची मिसाल बन चुके हैं, जहां पहुंच पाना बाकी लोगों के लिए मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन जैसा लगता है।

 अशोक साहू ने बीएससी, एमएससी और बीएड की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वर्ष 2006 में सोमगढ़ प्राथमिक शाला में शिक्षक के रूप में कार्य शुरू किया। 2006 से 2017 तक उन्होंने इस स्कूल में शिक्षा दी। इसके बाद अंग्रेजी विषय से प्रमोशन लेकर वर्ष 2017 में मालेगांव माध्यमिक शाला पहुंचे और वर्तमान में देव भिलाई शासकीय माध्यमिक शाला में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत हैं।

उनकी सेवा भावना का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देव भिलाई स्कूल में शिक्षकों की कमी को देखते हुए उन्होंने अपनी निजी तनख्वाह से दो शिक्षिकाओं को मासिक वेतन देना शुरू किया। ये शिक्षिकाएं कंचन देशमुख (नरखेड) और यशोदा नागले (मांगोनाकला) की बेटियां हैं, जो बच्चों को निष्ठा से पढ़ा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अशोक साहू बच्चों को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं और शिक्षा में कोई कमी न आए, इसलिए हर माह 10 हजार रुपये अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं।

श्री साहू का पारिवारिक जीवन भी समाज के लिए प्रेरणा है। उनके बड़े बेटे हेमंत साहू दुबई स्थित जीसीसी एवरेस्ट इंडस्ट्रीज एफजेडई में रीजनल मैनेजर हैं। छोटे बेटे प्रशांत साहू नेपाल में एवरेस्ट इंडस्ट्रीज में सीनियर ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं। बेटी निकिता साहू एमएससी मैथ्स कर चुकी हैं और पीएससी की तैयारी कर रही हैं।

कोरोना काल में अशोक साहू ने नरखेड और आसपास के क्षेत्र के मरीजों की सेवा कर यह साबित किया कि असली हीरो वही होते हैं जो संकट में साथ खड़े होते हैं। उन्होंने मरीजों को निजी वाहनों से बैतूल और अन्य राज्यों के अस्पतालों तक पहुंचाया, जिसके किराए, चालक और सहायक का खर्च भी स्वयं उठाया। इसके अलावा ग्रामीणों के सहयोग से ऑक्सीजन मशीन भी खरीदी गई, जिसमें सबसे बड़ी धनराशि श्री साहू ने दी।

– पूरे साहू समाज में इकलौती शख्सियत

इस सेवा कार्य में उन्हें आयुर्वेदिक चिकित्सक नंदकिशोर भोयरे (नरखेड) का भी सहयोग मिला। गांव के ओंकार साहू का कहना है कि जिस प्रकार कोरोना काल में अशोक साहू ने निस्वार्थ सेवा की, वैसी मिसाल आज तक किसी शासकीय अधिकारी या साहू समाज के पूंजीपतियों ने नहीं दी। वहीं मुलताई निवासी अजय साहू ने कहा कि अशोक साहू जैसी शिक्षकीय और सामाजिक शख्सियत पूरे साहू समाज में इकलौती है। अशोक साहू अपने कर्मों से समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। उन्होंने साबित किया है कि सेवा, समर्पण और शिक्षा का संगम अगर किसी एक इंसान में देखा जा सकता है तो वह हैं नरखेड के शिक्षक अशोक साहू।

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