Scam: किसानों के खेतों तक पहुंचा ही नहीं पानी, विभाग ने थमा दिए हजारों के बिल

मुलताई विधायक ने कलेक्टर से मिलकर किसानों को सुचारू रूप से पानी देने की मांग की

बैतूल। जिले की पारसडोह मध्यम उद्वाहन सिंचाई परियोजना का लाभ इस क्षेत्र के 42 गांव के लगभग 20 हजार किसानों को नहीं मिल पा रहा है। टूटी-फूटी और अव्यवस्थित गाड़ी गई पाइपलाइन इस योजना के लिए अभिशाप साबित हो रही है। लगभग 3 वर्षों में हजारों हेक्टेयर के रकबे में किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हो गया है। वहीं विभाग सिंचाई के नाम पर किसानों को हजारों रुपए के बिल थमा रहा है जबकि किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचा ही नहीं है। लाखों लीटर पानी नदी नालों में व्यर्थ बह रहा है किसानों ने इसका वीडियो क्लिप भी बनाकर प्रशासन को प्रेषित किया है। किसानों का आरोप है कि सिंचाई योजना के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला किया जा रहा है।

इस मामले में किसानों ने क्षेत्रीय विधायक चंद्रशेखर देशमुख को समस्या से अवगत करवाकर स्थाई निराकरण करने की मांग की है। किसानों की समस्या को देखते हुए मुलताई विधायक चंद्रशेखर देशमुख ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर किसानों की समस्या से अवगत कराया है। किसानों का आरोप है कि सिंचाई योजना के नाम पर विभाग के अफसर 3 वर्ष से शासन को झूठे आंकड़े पेश कर रहे हैं जबकि सिंचाई योजना से किसानों को नुकसान के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। परेशान किसानों ने अब न्यायालय की शरण में जाने का निर्णय लिया है। विधायक के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों में किसान नेता मकरध्वज सूर्यवंशी, उत्तमचंद खाकरे, चिंताराम हारोडे काजली, कन्ना लिलहोरे बोरगांव सहित 42 गांव के 6 सदस्य दल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल समस्या का निराकरण करने की मांग की है। किसान नेता मकरध्वज सूर्यवंशी ने बताया कि योजना से प्रस्तावित 42 ग्रामों के 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित तो की गई लेकिन पूर्ण एवं व्यवस्थित सिंचाई नहीं दी जा रही है। पारसडोह सिंचाई प्रणाली की प्रमुख समस्या पाइपलाइन निर्धारित गहराई में नहीं गाड़ी है जिससे खेत की जुताई में पाइपलाइन जगह-जगह फूट जाती है। टूटी फूटी अवस्थित गड़ी पाइप लाइन से बिना सूचना के मोटर पंप चालू कर पानी छोड़ दिया जाता है जिससे सिंचाई नहीं होकर किसानों को नुकसान हो रहा है। किसानों ने सिंचाई व्यवस्था का निरीक्षण कर पाइपलाइन की गहराई, प्रेशर, स्प्रिंकलर से सिंचाई का निरीक्षण कर दोषी ठेकेदार एवं अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की।

— घाटे का सौदा साबित हो रही योजना–

कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने बताया कि खेतों में सिंचाई की जगह पानी नदी नालों में व्यर्थ बह रहा है, जिससे शासन को लगभग 4 करोड़ बिजली बिल का भार प्रतिवर्ष आ रहा है, जिससे यह योजना घाटे का सौदा साबित हो रही है और बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। शासन के नियम अनुसार किसी भी ग्राम में पारसडोह सिंचाई प्रणाली से विगत 5 वर्षों में गेहूं की फसल को पलेवा तीन पानी देकर नहीं पकाया गया है, जिससे अन्नदाता एवं शासन को नुकसान हो रहा है। इतना होते हुए भी विभाग एवं ठेकेदार की मिली भगत से शासन एवं मीडिया को विगत 5 वर्षों में 20 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होना बताया गया एवं योजना से सिंचाई दी गई है यह आरोप लगाकर कृषकों को झूठे सिंचाई बिल प्रदाय किए गए।

— इतने बड़े कमांड क्षेत्र में काम कर रहे महज 10 कर्मचारी–

गौरतलब है कि विभाग और ठेकेदार के एग्रीमेंट के अनुसार इतनी बड़ी परियोजना की व्यवस्था के लिए अधिकारी, कर्मचारी एवं कार्यकर्ता शासन से प्रस्तावित है, उनकी पूर्ण रूप से नियुक्ति नहीं की गई है और जो नियुक्त है वह भी काम नहीं कर रहे हैं। किसानों के अनुसार इतने बड़े कमांड क्षेत्र में कम से कम 100 लोगों ने काम करना चाहिए था, लेकिन किसानों का दुर्भाग्य है कि इतनी बड़ी कमांड क्षेत्र में 8 से 10 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं, जिससे पूरे 45 ग्रामों के 20 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि क्षेत्र में अव्यवस्था बनी हुई है, फसल सूखने की कगार पर है। इस योजना से प्रस्तावित 45 गांव में 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित तो की गई लेकिन पूर्ण एवं व्यवस्थित सिंचाई नहीं दी जा रही है। पारसडोह जलाशय में भरपूर मात्रा में जल संग्रहित है, क्षेत्र में पाइप लाइन बिछी हुई है। शासन ने व्यवस्था के लिए पैसे उपलब्ध करा रखे हैं लेकिन विभाग एवं ठेकेदार के कुप्रबंधन एवं अक्षमता के कारण 45 गांव में कहीं भी सिंचाई व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित नहीं है, जिससे 2 अरब 25 करोड रुपए का क्षेत्र एवं जिले को नुकसान होगा।

— जनसुनवाई से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक की शिकायत नहीं हो रहा निराकरण–

किसानों का कहना है कि पारसडोह सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या का निराकरण न तो ठेकेदार द्वारा ना विभाग के अधिकारियों के द्वारा ना ही जनसुनवाई में आवेदन देने के बावजूद किया गया। सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से भी समस्याओं का निराकरण नहीं हो रहा है। पूरे क्षेत्र में अन्नदाताओं के मन में हताशा एवं निराशा का भाव उपजा हुआ है। विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी ठेकेदार के पिट्ठू बनकर रह गए हैं। ठेकेदार की अनुमति के बिना कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। उक्त योजना की समीक्षा कर यदि अव्यवस्था दूर नहीं की गई तो 42 गांव के 20 हजार हेक्टेयर से लाभान्वित होने वाले कृषकों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

— बुवाई को लेकर जारी की गई थी अधिसूचना–

किसानों ने बताया 30 सितंबर 2023 के आसपास पारसडोह जलाशय से बुवाई को लेकर अधिसूचना जारी हुई थी। जिला जल उपयोगिता समिति के प्रस्ताव अनुसार पारसडोह सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से 42 गांव के 20 हजार हेक्टेयर भूमि को पानी देना प्रस्तावित किया गया था। मीडिया एवं समाचार पत्रों की बातों पर विश्वास करके बुवाई के समय मावठा गिरने से प्रस्तावित 42 ग्राम में 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई प्राप्त करने की प्रत्याशा में बुवाई कर दी गई। पारसडोह सिंचाई प्रणाली से कमांड के सभी कृषक पानी चाह रहे हैं। कमांड क्षेत्र के सभी किसानों ने गेहूं की फसल लगा दी है और अब किसानों की फसल बिना पानी के सुख रही है। यदि पानी की समस्याओं को लेकर ठेकेदार के अधिकारी कर्मचारी से बात करते हैं तो कहा जाता है कि हमारी योजना की टेस्टिंग चल रही है और हमने फसल बोने के लिए नहीं कहा था। हमारी पानी देने की जिम्मेदारी नहीं है। किसानों ने सवाल उठाए कि यदि योजना का कार्य पूर्ण नहीं हुआ और टेस्टिंग ही चल रही है तो बुवाई के लिए अधिसूचना क्यों जारी की गई और किसानों को सिंचाई बिल क्यों प्रदान किए गए। अधिसूचना और सिंचाई बिल दोनों तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।

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