Betul news : ग्राम खानापुर में राम कथा के समापन पर हुआ विशाल भंडारा

सूर्यवंशी ढोलेवार कुनबी समाज ने आयोजन की सफलता के लिए माना आभार

Betul news: बैतूल। आमला ब्लाक के अंतर्गत आने वाले ग्राम खानापुर में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कथा के अंतिम दिन वैदिक विधि विधान के अनुसार हवन पूजन के बाद कन्या भोज एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों से आए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर अपने को धन्य बनाया।

सूर्यवंशी ढोलेवार कुनबी समाज ने बताया कि भंडारा सुबह से लगातार देर रात तक चलता रहा। भंडारे में पूरे मंदिर परिसर के आसपास हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। सैकड़ों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में भंडारे का सही संचालन हो सका और कार्यकर्ताओं ने भरपूर सहयोग प्रदान किया। 9 दिनों तक आयोजित राम कथा में राजनेता, समाजसेवी, धार्मिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित हुए। आयोजन की सफलता के लिए सूर्यवंशी ढोलेवार कुनबी समाज ने समस्त श्रद्धालुओं सहित प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सेवाभावी लोगों का आभार व्यक्त किया है।

नौ दिनों तक लगा रहा श्रद्धालुओं का तांता

सूर्यवंशी ढोलेवार कुनबी समाज के तत्वावधान में अंबाजी संस्थान द्वारा यह धार्मिक आयोजन किया गया। श्रीराम कथा के दौरान श्रद्धालुओ ने नौ दिन तक भक्तिभाव के साथ कथा का श्रवण किया। अम्बे मंदिर की अद्भुत छटा, भक्तों की श्रद्धा एवं आस्था का ही परिणाम है कि आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। 9 दिवसीय श्री राम कथा में धर्मपथ गामिनी, वृंदावन धाम मथुरा निवासी देवी पूजा किशोरी जी द्वारा अपनी अमृतमयी वाणी से संगीतमय श्री राम कथा का वाचन किया गया।

भक्ति मार्ग से जुड़ने की अपील

देवी पूजा किशोरी जी ने कथा में भक्तों को श्री राम कथा की महिमा बताई। उन्होंने लोगों से भक्ति मार्ग से जुड़ने और सत्कर्म करने को कहा। उन्होंने कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है।

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