Betul news: युवाओं ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

पुण्यतिथि पर पुष्प माला अर्पित कर दी श्रद्धांजलि, विचारों को किया आत्मसात

बैतूल। शहर के युवाओं के एक संगठन ने शुक्रवार 19 जनवरी को वीरता शौर्य स्वाभिमान और पराक्रम के प्रतीक, मातृभूमि एवं धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की पुण्यतिथि मनाई। युवाओं ने लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम के पास स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्प माला अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर निक्की राजपूत, संकेत राजपूत, शांतनु बाजपेयी, अप्पू महाराज, मनीष मालवी, फलक सिसोदिया, किट्टू अग्निहोत्री सहित अन्य युवा उपस्थित रहे। पुण्यतिथि के अवसर पर युवाओं ने पराक्रम के प्रतीक महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया, वहीं उनके जीवन चरित्र और विचारों को आत्मसात किया।

महाराणा प्रताप के जीवन पर प्रकाश डालते हुए निक्की राजपूत ने कहा कि मेवाड़ के महान राजपूत नरेश महाराणा प्रताप अपने पराक्रम और शौर्य के लिए पूरी दुनिया में मिसाल के तौर पर जाने जाने जाते है। इनका जन्म 9 मई 1540 ई.को राजस्थान के कुंभलगढ दुर्ग में हुआ था। इनके पिता महाराजा उदयसिंह थे। महाराणा प्रताप 1572 में मेवाड़ के शासक बन गए थे। यह एक ऐसे राजपूत सम्राट थे, जिन्होंने जंगलों में रहना पसंद किया लेकिन कभी विदेशी मुगलों की दासता स्वीकार नहीं की। मेवाड़ को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने कई युद्ध लड़े और जीते। महाराणा प्रताप के काल में दिल्ली में मुगल सम्राट अकबर का शासन था जो भारत के सभी राजा -महाराजा को अपने अधीन कर मुगल साम्राज्यो की स्थापना कर इस्लामिक परचम को पुरे हिन्दुस्तान में फहराना चाहता था। उन्होंने मुगल बादशाह अकबर के खिलाफ हल्दीघाटी का युद्ध 1576 में लड़ा। उनके सबसे प्रिय घोडे़ का नाम चेतक था, जो बड़ी बड़ी नदियों और पहाड़ों को छलांग लगा देता था। 30 वर्षों के लगातार प्रयास के बावजुद अकबर महाराणा प्रताप को बंदी ना बना सका। उदयपुर के सिटी पैलेस में महाराणा प्रताप से जुडी़ कई चीजों को सभागर में रखा गया है। 19 जनवरी 1597 को चावंड में महारणा प्रताप ने अंतिम सांस ली थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button