Vanvasi leela: सीहोर, सलकनपुर और देवास में आयोजित श्रीराम लीला में बैतूल के कलाकारों ने बजाया डंका
कलाकारों ने वनवासी लीला में श्री राम के वन गमन पर अयोध्या का मार्मिक दृश्य प्रस्तुत किया

Vanvasi leela: बैतूल। मध्यप्रदेश शासन सांस्कृतिक विभाग एवं आदिम कल्चरल एंड वेलफेयर सोसाइटी बैतूल द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से सलकनपुर, सीहोर तथा देवास में 14 से 16 जनवरी तक श्री हनुमान, भक्ति मति शबरी एवं निषादराज गुह्य लीला नाट्य प्रस्तुतियां आयोजित की गई। सीहोर, सलकनपुर और देवास में आयोजित श्रीराम लीला में बैतूल के कलाकारों ने राकेश वरवड़े के निर्देशन में शानदार वनवासी लीला की प्रस्तुति दी। सीहोर के टाउन हॉल में वनवासी लीला का आयोजन किया गया।
मंच पर उपस्थित कलाकार राकेश वरवड़े, सचिन खातरकर, भावना नागले, भारती नागले, महेंद्र नागले, सुमित सातनकर, नीरज कुम्भारे, विशाल ईवन, विशाल बारवे, श्रद्धा प्रजापति, सृष्टि प्रजापति, वैष्णवी, राकेश गावंडे, सतेंद्र चौहान, गगनराज, राजकारण भलावी, पंकज, राजकुमार साहू, रामकिशोर साहू, केशव साहू ने जीवंत नाट्य की प्रस्तुति दी। कलाकारों द्वारा भगवान श्री राम के वन गमन पर अयोध्या के मार्मिक दृश्य सहित श्री राम के जीवन चरित्र पर आधारित अनेक दृश्यों की प्रस्तुति दी गई। कलाकारों द्वारा दी गई प्रस्तुति से कार्यक्रम स्थल पर दर्शक भावुक हो गए।
भगवान श्री राम, माता सीता तथा लक्ष्मण को तपस्वी परिधानों में वन की तरफ प्रस्थान करने का दृश्य देख सभी दर्शकों की आंखें नम हो गई। भगवान श्री राम के वन गमन से पहले माता कैकेयी राजा दशरथ से उनके दिए हुए वचन के बदले भरत को राजा और श्री राम को वनवास की मांग करती है। विवश होकर राजा दशरथ अपने वचन को निभाते हुए राम को वन जाने का संदेश भेजते है। पिता की आज्ञा पाकर श्री राम, लक्ष्मण व सीता. के साथ वन पथ पर प्रस्थान करते हैं। श्री राम जब नदी के तट पर पहुंचते है तब केवट द्वारा श्रीराम को गंगा पार कराने से पहले पांव प्रखारना चाहते है। केवट द्वारा पांव पखारने के बाद श्री राम को गंगा पार कराया जाता है। दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो गए।




