एक रक्षाबंधन ऐसा भी…डॉ. मनोज कुमार सोनारे पर्यावरण संरक्षण एवं जनजाति ग्रुप के संचालक की कलम से सभी को समर्पित

रक्षाबंधन प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और जिम्मेदारी के उस रिश्ते का उत्सव है, जो भाई-बहन को जीवनभर एक-दूसरे से जोड़े रखता है। बदलते समय में इस पर्व के अर्थ को और व्यापक बनाने की जरूरत है। क्यों न इस बार रक्षाबंधन की डोर प्रकृति, प्राणी, समाज और मानवता से भी जुड़ जाए। ऐसा रक्षाबंधन हो, जिसमें प्रेम के साथ भाईचारा, समरसता, समानता, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी शामिल हो।
हमारे देश में वर्षभर अनेक त्योहार मनाए जाते हैं, लेकिन रक्षाबंधन का अपना अलग महत्व है। यह पर्व भाई-बहन के सच्चे प्रेम, विश्वास और कर्तव्य की याद दिलाता है। आज जब रिश्ते छोटी-छोटी बातों और मतभेदों के कारण कमजोर हो रहे हैं, तब रक्षाबंधन उन्हें फिर से मजबूत करने का अवसर भी बन सकता है। भाई-बहन पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे के करीब आएं, मन की कड़वाहट दूर करें और प्रेम व विश्वास के साथ रिश्ते को आगे बढ़ाएं।
इस बार रक्षाबंधन पर भाई-बहन एक-दूसरे को पौधा उपहार में देकर प्रकृति के प्रति प्रेम का संदेश दे सकते हैं। परिवार मिलकर कम से कम एक या दो पौधे जरूर लगाए और केवल पौधारोपण तक सीमित न रहकर उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी उठाए। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, हरियाली और संतुलित पर्यावरण देना हमारी जिम्मेदारी है। पेड़ लगाना आज का छोटा-सा प्रयास है, लेकिन इसका लाभ आने वाली कई पीढ़ियों को मिलेगा।
प्रकृति की रक्षा के साथ पशु-पक्षियों और अन्य प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी है। हमारे आसपास मौजूद जीव-जंतु प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस रक्षाबंधन हम संकल्प लें कि बेजुबान प्राणियों के प्रति प्रेम और करुणा रखेंगे, उनकी सुरक्षा में सहयोग करेंगे और प्रकृति के हर जीव के अस्तित्व का सम्मान करेंगे।
रक्षाबंधन उन लोगों को सम्मान देने का भी अवसर बन सकता है, जो समाज और देश के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। हमारे आसपास ऐसे लोग हैं, जो शिक्षा, सामाजिक सेवा, जरूरतमंदों की सहायता और अन्य जनहित के कार्यों में जुटे हैं। ऐसे लोगों को राखी बांधना, सम्मानित करना या उपहार देना समाज में सकारात्मकता बढ़ाने वाला कदम होगा। सीमा पर तैनात जवानों को भी राखी और शुभकामनाएं भेजकर यह एहसास कराया जा सकता है कि देश की रक्षा में जुटे इन भाइयों को समाज कभी नहीं भूलता।
जो जवान अपनी बहनों से मिलने के लिए घर नहीं आ पा रहे हैं, उनकी बहनें उन्हें राखी, पत्र और उपहार भेज सकती हैं। वीडियो कॉल के माध्यम से शुभकामनाएं दी जा सकती हैं। बहनें अपने भाई से यह वचन भी ले सकती हैं कि वह केवल अपनी बहन की रक्षा नहीं, बल्कि समाज की हर बहन के सम्मान और सुरक्षा के लिए भी खड़ा रहेगा। किसी महिला या बेटी के साथ अत्याचार होता देखकर चुप न रहने और जरूरत पड़ने पर उसकी मदद करने का संकल्प रक्षाबंधन के वास्तविक भाव को और मजबूत करेगा।
इसी के साथ नशामुक्ति का संकल्प भी रक्षाबंधन का हिस्सा बनना चाहिए। बहनें भाइयों से वचन लें कि वे किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगे। जो भाई नशे की गिरफ्त में हैं, वे इस पवित्र अवसर से इसे छोड़ने की शुरुआत करें। एक व्यक्ति का नशामुक्त होना केवल उसकी अपनी जिंदगी नहीं बदलता, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों और भविष्य को सुरक्षित करता है।
आज के डिजिटल युग में दूरी भी रिश्तों के प्रेम को कम नहीं कर सकती। नौकरी, व्यवसाय या अन्य जिम्मेदारियों के कारण जो भाई-बहन रक्षाबंधन पर एक-दूसरे से नहीं मिल पा रहे हैं, वे राखी, मिठाई और अपनी पसंद के उपहार डाक या पार्सल से भेज सकते हैं। वीडियो कॉल पर एक-दूसरे से जुड़कर त्योहार मना सकते हैं। उपहार खोलने से लेकर पारिवारिक बातचीत तक, हर खुशी डिजिटल माध्यम से साझा की जा सकती है। जरूरी यह है कि दूरी के बावजूद दिलों के बीच दूरी न आए।
रक्षाबंधन पर यात्रा करने वालों को भी सावधान रहने की जरूरत है। त्योहार के दौरान बसों, ट्रेनों और अन्य सार्वजनिक परिवहन में भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में अपने सामान, बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। जल्दबाजी से बचें और यात्रा के दौरान सतर्क रहें। त्योहार की खुशी तभी पूरी होगी, जब सभी सुरक्षित अपने घर और परिवार तक पहुंचें। देर भली, लेकिन अनहोनी नहीं।
त्योहार में मिठाई और पकवानों का विशेष महत्व है, लेकिन स्वाद के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। मिलावटी खाद्य पदार्थों और नकली सामान से बचें। मिठाई, खाद्य सामग्री या उपहार खरीदते समय गुणवत्ता और विश्वसनीयता की जांच करें। जहां संभव हो, घर में तैयार पकवानों को प्राथमिकता दें। त्योहार की खुशी ऐसी किसी लापरवाही में न बदल जाए, जिससे परिवार के किसी सदस्य की सेहत प्रभावित हो।
रक्षाबंधन का असली अर्थ तभी पूरा होगा, जब राखी की डोर कलाई से निकलकर हमारे व्यवहार तक पहुंचे। इस बार एक राखी रिश्ते के नाम, एक पौधा प्रकृति के नाम, एक संकल्प मानवता के नाम और एक सम्मान देश की रक्षा करने वालों के नाम होना चाहिए। बच्चों को भी समझाना होगा कि त्योहार केवल नए कपड़े, मिठाई और उपहार का नाम नहीं, बल्कि संस्कार, सेवा, प्रेम और जिम्मेदारी का अवसर हैं।
जब भाई अपनी बहन की रक्षा के साथ हर बहन के सम्मान की जिम्मेदारी समझेगा, जब बहन भाई की लंबी उम्र के साथ उसके स्वस्थ और नशामुक्त जीवन की कामना करेगी, जब परिवार एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी उठाएगा और जब समाज अपने सच्चे रक्षकों का सम्मान करेगा, तभी रक्षाबंधन का पर्व अपने वास्तविक अर्थ में सार्थक होगा।
आइए, इस रक्षाबंधन पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर रिश्तों को फिर से मजबूत करें, आसपास खुशियां बांटें, पर्यावरण की रक्षा करें, एक पौधा जरूर लगाएं और समाज को बेहतर बनाने का संकल्प लें। राखी की यह डोर केवल भाई-बहन को नहीं, बल्कि पूरे समाज को प्रेम, समानता, भाईचारे और मानवता के सूत्र में बांधे—यही इस रक्षाबंधन की सबसे बड़ी सार्थकता होगी।
डॉ. मनोज कुमार सोनारे
पर्यावरण संरक्षण एवं जनजाति ग्रुप के संचालक
की कलम से सभी को समर्पित




