सावन में मां ताप्ती स्वयं करती हैं बारहलिंग के 12 शिवलिंगों का जलाभिषेक

राम-सीता के वनवास की मान्यता से जुड़े बारहलिंग में सावन में उमड़ती है आस्था

बैतूल। सावन में बैतूल का बारहलिंग शिवधाम आस्था और प्रकृति के अनूठे संगम का साक्षी बनता है। यहां ताप्ती तट की काली चट्टानों पर विराजित 12 शिवलिंगों का जलाभिषेक सूर्यपुत्री मां ताप्ती की जलधारा स्वयं करती है। सावन में चार-पांच बार ताप्ती का जलस्तर इतना बढ़ता है कि नदी दोनों किनारों को जलमग्न करते हुए शिवलिंगों तक पहुंचती है। इस अद्भुत प्राकृतिक दृश्य को देखने महाराष्ट्र सहित दूर-दराज से श्रद्धालु बारहलिंग पहुंचते हैं।

– राम-सीता के वनवास से जुड़ी है मान्यता

पौराणिक मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण यहां तीन दिन रुके थे। श्रीराम ने ताप्ती तट पर अपने पितरों का तर्पण किया था। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने भगवान विश्वकर्मा की सहायता से यहां की चट्टानों पर 12 शिवलिंगों की आकृतियां उकेरकर उनकी प्राण-प्रतिष्ठा की थी। इन्हीं 12 शिवलिंगों के कारण यह स्थान बारहलिंग के नाम से प्रसिद्ध हुआ। राम-लक्ष्मण मंदिर और सीता स्नानागार भी इसी धार्मिक परंपरा से जुड़े प्रमुख स्थल माने जाते हैं।

– ठेस्का के पास ताप्ती तट पर स्थित है तीर्थ

बारहलिंग तीर्थ बैतूल से करीब 19 किलोमीटर दूर खेड़ी-परतवाड़ा मार्ग के जोड़ से लगभग 3 किलोमीटर दूर ग्राम ठेस्का के समीप ताप्ती नदी के तट पर स्थित है। मुलतापी से निकलने वाली सूर्यपुत्री मां ताप्ती के किनारे स्थित यह प्राचीन शिवस्थल सावन में विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और ताप्ती स्नान के लिए पहुंचते हैं।

– कार्तिक पूर्णिमा पर लगता है धार्मिक मेला

बारहलिंग में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बड़ा धार्मिक मेला आयोजित होता है। इसमें दूर-दराज से श्रद्धालु ताप्ती स्नान और बारहलिंग के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ताप्ती तट पर स्थित होने के कारण इस शिवालय का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

– सालभर होते हैं धार्मिक आयोजन

मां सूर्यपुत्री ताप्ती जागृति समिति द्वारा प्रतिवर्ष तीन बार यहां ताप्ती ध्वजारोहण कर ताप्ती जन्मोत्सव मनाया जाता है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर दयाराम पंवार के अनुसार मां ताप्ती के दोनों तटों पर वर्षभर मकर संक्रांति, शिवरात्रि, ताप्ती जन्मोत्सव और श्राद्ध पक्ष में पितरों के तर्पण सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं।

– सर्पदोष शांति की भी मान्यता

ताप्ती तट पर सर्पदोष शांति के धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं। समिति के अनुसार धार्मिक मान्यता है कि मां ताप्ती का वाहन सर्प है, इसलिए उनके तट पर पूजा-अर्चना और अनुष्ठान करने से सर्पदोष से मुक्ति मिलती है। इसी आस्था के चलते श्रद्धालु वर्षभर यहां पहुंचते हैं। बारहलिंग में प्राचीन शिवलिंग, ताप्ती की जलधारा और राम-सीता से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं इसे बैतूल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष पहचान देती हैं।

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