नायब तहसीलदार के पदों पर शत-प्रतिशत पदोन्नति की मांग, राजस्व निरीक्षक संघ ने सौंपा ज्ञापन
रिक्त 672 पदों पर विभागीय पदोन्नति की मांग, बारिश में रोवर मशीन से सीमांकन पर भी जताई आपत्ति

बैतूल। नायब तहसीलदार के रिक्त पदों पर शत-प्रतिशत विभागीय पदोन्नति सहित अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर मध्यप्रदेश राजस्व निरीक्षक संघ जिला इकाई बैतूल ने सोमवार को शासन के खिलाफ हुंकार भरी। संघ के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार वसूले और जिला सचिव राहुल इवने के नेतृत्व में राजस्व निरीक्षकों ने अपर कलेक्टर कामिनी ठाकुर और डिप्टी कलेक्टर अनीता पटेल को मुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान राजस्व निरीक्षकों ने प्रभारी अधिकारी (भू-संसाधन प्रबंधन) से भी मुलाकात कर विभागीय समस्याओं और विसंगतियों से अवगत कराया।
संघ ने ज्ञापन में बताया कि प्रदेश में नायब तहसीलदार के कुल 672 पद (सीमित विभागीय परीक्षा को छोड़कर) रिक्त हैं। इनमें सीधी भर्ती के 538 और भू-संसाधन प्रबंधन के 69 पद शामिल हैं। संघ का कहना है कि प्रदेश में कार्यरत राजस्व निरीक्षकों की संख्या भी लगभग इतनी ही है। ऐसे में नियमों में एक बार के लिए विशेष संशोधन कर सीधी भर्ती को रोकते हुए रिक्त पदों पर कार्यरत राजस्व निरीक्षकों को विभागीय पदोन्नति दी जानी चाहिए।
जिला अध्यक्ष सुनील कुमार वसूले और जिला सचिव राहुल इवने ने कहा कि इससे शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, क्योंकि अधिकांश राजस्व निरीक्षक पहले से ही नायब तहसीलदार के समकक्ष वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं। अनुभवी राजस्व निरीक्षकों को पदोन्नति मिलने से प्रशिक्षण में लगने वाला समय भी बचेगा और उनके अनुभव का लाभ प्रशासनिक कार्यों तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मिलेगा।
– बारिश में रोवर मशीन से सीमांकन नहीं कराने की मांग
संघ ने बारिश के मौसम में रोवर मशीन से सीमांकन कराए जाने पर भी गंभीर आपत्ति जताई। राजस्व निरीक्षकों ने बताया कि बारिश में रोवर मशीन से सीमांकन नहीं कराने का अनुरोध पूर्व में भी किया जा चुका है, लेकिन भू-संसाधन प्रबंधन आयुक्त, ग्वालियर की ओर से रोवर मशीन की मेंटेनेंस पॉलिसी अभी तक जारी नहीं की गई है। इसके बावजूद जिले के समस्त तहसीलदारों द्वारा बारिश के दौरान भी रोवर मशीन से सीमांकन कराने की मांग की जाती है।
संघ के अनुसार बारिश के दौरान खेतों में सीमा चिन्ह स्पष्ट दिखाई नहीं देते। ऐसे में राजस्व निरीक्षक, संबंधित पटवारी, रोवर मशीन ऑपरेटर पटवारी एवं दल के अन्य सदस्यों के लिए सांप के काटने का खतरा बना रहता है। साथ ही सीमांकन के दौरान पड़ोसी किसान की फसल खराब होने की आशंका भी रहती है। संघ ने बताया कि एक रोवर मशीन की कीमत लगभग 8 से 10 लाख रुपए है। मशीन के पार्ट खराब होने पर राजस्व निरीक्षक अथवा पटवारियों को जिम्मेदार माना जाता है, जो उचित नहीं है।
संघ ने मांग की है कि जब तक रोवर मशीन की विधिवत मेंटेनेंस पॉलिसी जारी नहीं होती, तब तक बारिश के मौसम में रोवर मशीन से सीमांकन नहीं कराया जाए। साथ ही मशीन की मांग करने वाले तहसीलदार अथवा मशीन संचालन का आदेश जारी करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय की जाए। मशीन खराब होने अथवा उसके पार्ट खराब होने की स्थिति में जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की निर्धारित की जाए, ताकि राजस्व निरीक्षक और पटवारियों को अनावश्यक रूप से दोषी न ठहराया जाए।
– पदोन्नति कोटा 75 प्रतिशत करने की भी मांग
संघ ने कहा कि यदि तकनीकी अथवा नियमगत कारणों से नायब तहसीलदार के पदों पर शत-प्रतिशत पदोन्नति संभव नहीं है तो भू-संसाधन प्रबंधन के अंतर्गत पदोन्नति का कोटा बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया जाए, ताकि पात्र राजस्व निरीक्षकों को कम समय में पदोन्नति का लाभ मिल सके।
इसके अलावा संघ ने लंबे समय से लंबित स्टेशनरी भत्ते को बढ़ाकर 2500 रुपए तथा अतिरिक्त सर्किल भत्ते को बढ़ाकर 10 हजार रुपए किए जाने की मांग भी रखी। राजस्व निरीक्षकों ने कहा कि कई साथी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं। ऐसे में पदोन्नति मिलने से उनका मनोबल बढ़ेगा और विभाग में वरिष्ठता का सही निर्धारण भी सुनिश्चित हो सकेगा।
संघ ने शासन से मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र आदेश जारी करने की मांग की है। ज्ञापन सौंपते समय राजस्व निरीक्षक सुनील कुमार वसूले, नंद किशोर उइके, राजू लोखंडे, राहुल इवने और पूनम उइके उपस्थित रहे।




