बीच सड़क में फंसी स्कूली बच्चों से भरी बस।
शिवसेना प्रदेश सचिव ने सोशल मीडिया पर दी थी चेतावनी, अगले दिन सामने आया खतरा।

बैतूल। शहर के कॉलेज चौक पर लाखों की लागत से कराए गए सड़क, पुलिया और सौंदर्यीकरण कार्यों की गुणवत्ता तथा कार्ययोजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 26 जून को शिवसेना प्रदेश सचिव विजेंद्र कुमार गोले ने सोशल मीडिया के माध्यम से जिस संभावित खतरे को लेकर आगाह किया था, ठीक अगले ही दिन उसी स्थान पर आरडी पब्लिक स्कूल की बस फंस जाने से सैकड़ों स्कूली बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। घटना के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
विजेंद्र कुमार गोले ने 26 जून को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर कॉलेज चौक क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बनी पुलिया, सड़क और कराए गए सौंदर्यीकरण कार्यों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने लिखा था कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पाइपलाइन फूट रही हैं और नई बनी सड़कों को दोबारा खोदकर क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। उन्होंने इसे जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए विकास कार्यों में कथित कमीशनखोरी और बिना समुचित योजना के निर्माण कार्य कराए जाने पर सवाल खड़े किए थे।
विजेंद्र कुमार गोले का कहना है कि उनकी चेतावनी के महज 24 घंटे बाद, 27 जून को आरडी पब्लिक स्कूल की बस इसी स्थान पर फंस गई। बस में सवार सैकड़ों बच्चों की जान जोखिम में पड़ गई और मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इस दौरान कोई बड़ा हादसा हो जाता या बच्चों को किसी प्रकार की क्षति पहुंचती, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होती।
उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की लागत से सड़कें बिना दीर्घकालिक योजना के बनाई जा रही हैं। निर्माण के बाद पाइपलाइन फूटने जैसी समस्याएं सामने आती हैं और फिर नई सड़कों की खुदाई कर उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया जाता है। विजेंद्र कुमार गोले ने तंज कसते हुए कहा कि यदि विकास का यही मॉडल है, जिसमें जनता के धन से बने कार्य कुछ ही समय में उखड़ने लगें और स्कूली बच्चों की जान जोखिम में पड़ जाए, तो ऐसे कार्यों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
उन्होंने मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों, एजेंसियों और निर्माण कार्यों से जुड़े पक्षों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, तकनीकी समन्वय और जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।




